भोपाल के कमला नेहरू हॉस्पिटल में हुई आगज़नी को लेकर एसयूसीआई द्वारा विरोध प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम सौंपा गया ज्ञापन | New India Times

अबरार अहमद खान/मुकीज़ खान, भोपाल (मप्र), NIT:

भोपाल के कमला नेहरू हॉस्पिटल में हुई आगज़नी को लेकर एसयूसीआई द्वारा विरोध प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम सौंपा गया ज्ञापन | New India Times

भोपाल के कमला नेहरू हॉस्पिटल में हुई आगज़नी को लेकर एसयूसीआई के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन करते हुऐ मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंप कर पीडितों को उचित मुआवजे एवं जाँच की मांग की है। प्रदर्शन को संबोधित करते हुए एस यु सी आई कम्युनिस्ट की जिला कमेटी सदस्य श्रीमती जोली सरकार ने कहा की अभी तक 13 असहाय नवजातों की जान जा चुकी है और पहले ही मौत से संघर्ष कर रही कई नन्ही जानों की ज़िंदगी पर मौत का खतरा और बढ़ गया है। विगत 6 माह में पीडियाट्रिक वार्ड में शॉर्ट सर्किट की यह तीसरी घटना है। यह वो वार्ड है जिसमें जीने का संघर्ष कर रहे बच्चों को रखा जाता है। लेकिन वहाँ पर भी अपार अनियमितताएं थीं। पूर्व में घटित आगजनी की घटनाओं के बावज़ूद वार्ड और अस्पताल में फायर एंड सेफ्टी की अत्यंत लचर व्यवस्था के साथ ही पर्याप्त मात्रा में अग्निशमन यंत्र उपलब्ध नहीं थे, और जो थे, वे भी उचित रखरखाव के अभाव में ठीक से काम नहीं कर पाए, अन्यथा आग इतनी नहीं फैलती। वार्ड में ज़रूरत की तुलना में चिकित्सा स्टाफ, सुरक्षाकर्मी भी अपर्याप्त संख्या में थे। ये सभी तथ्य प्रशासन के अत्यंत गैरज़िम्मेदाराना रवैये और बच्चों के जीवन के प्रति सरकारी उदासीनता को उजागर कर रहे हैं। एक ओर जहां स्वास्थ्य बजट में भारी कटौती कर सरकारी अस्पतालों को आवश्यक न्यूनतम फण्ड से भी महरूम किया जा रहा है, जिससे अस्पतालों में न्यूनतम मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, और असहाय गरीब माँ-बाप मुनाफाखोर निजी अस्पतालों में जाने को मजबूर किये जा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ जनता की गाढ़ी कमाई से वर्षों में निर्मित सरकारी अस्पतालों का संचालन भी निजी हाथों में दिया जा रहा है। गौरतलब है कि उक्त अस्पताल की इमारत का विधुत रखरखाव भी सी.पी.ए के हाथों में था, जिसके निम्न दर्ज़े के घटिया उपकरण और अकुशल कर्मचारियों द्वारा रखरखाव कराया जाना प्रथम दृष्टया इस घटना का जिम्मेदार प्रतीत होता है।
स्वास्थ्य सेवाओं में भी विभिन्न कार्यों को आउटसोर्स किया जा रहा है,जहां अप्रशिक्षित व अकुशल लोगों को कम तनख्वाह पर रखा जाता है, साथ ही ये निजी कंपनियां मुनाफे की प्रवृत्ति के चलते घटिया उपकरणों का इस्तेमाल करती हैं, जो भोपाल ही नहीं, वरन प्रदेश के अन्य तमाम शहरों में होने वाली ऐसी घटनाओं का कारण बनता है।
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुये व सरकार से मांग की…..
1) मृत नवजातों के अभिभावकों को १० लाख मुआवज़ा और हादसे में घायल बच्चों के अभिभावकों को ५ लाख मुआवजा राशि दी जाए।

2) घटना के लिए प्रथम दृष्टया दोषी अस्पताल प्रशासन और विधुत रखरखाव करने वाली कम्पनी पर गैरइरादतन हत्या का मामला दर्ज किया जाए, और तत्पश्चात पुनरावृत्ति रोकने के लिए ज़िम्मेदार तमाम कारकों की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच करवाई जाए और उसमें भी दोषी पाए जाने वालों को सख्त सज़ा दी जाए।
3) उक्त अस्पताल एवं प्रदेश के सभी अन्य शासकीय अस्पतालों में आवश्यक सेवाओं की आउटसोर्सिंग के तमाम ठेके रद्द कर सरकार इन्हें पुनः अपने हाथ में ले।
4) प्रदेश के अस्पतालों में पर्याप्त संख्या में चिकित्सकीय एवं अन्य तकनीकी स्टाफ की स्थायी भर्ती की जाए।
5) प्रदेश सरकार स्वास्थ्य के निजीकरण को अविलम्ब वापस ले एवं स्वास्थ्य बजट में पर्याप्त बढ़ोतरी करे।

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