
अबरार अहमद खान/मुकीज़ खान, भोपाल (मप्र), NIT:
राजधानी भोपाल की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। एक ओर इक़बाल मैदान के सामने स्थित 160 वर्ष पुराने मोती महल को मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन बोर्ड द्वारा 17 करोड़ रुपये की लागत से सिटी म्यूज़ियम के रूप में नया स्वरूप दिया जा रहा है, वहीं शहर की पहचान माने जाने वाले दर्जनों बुलंद दरवाज़े, महल, बावड़ियां और मकबरे बदहाली और अतिक्रमण की चपेट में हैं।

मध्यप्रदेश सर्वधर्म सद्भावना मंच के सचिव हाजी मोहम्मद इमरान ने मोती महल के पुनर्विकास की सराहना करते हुए कहा कि इससे शहर की सुंदरता बढ़ेगी और पर्यटन को प्रोत्साहन मिलेगा। हालांकि, उन्होंने यह भी चिंता जताई कि एक ही ऐतिहासिक धरोहर को दूसरी बार करोड़ों रुपये खर्च कर संवारा जा रहा है, जबकि पहले भी पुरातत्व विभाग द्वारा मोती महल पर भारी बजट खर्च किया जा चुका है, जो उचित देखरेख के अभाव में फिर जर्जर हो गया।

हाजी इमरान ने कहा कि नवाबों की सदर मंज़िल को हेरिटेज होटल के रूप में विकसित किए जाने के बाद अब मोती महल को सिटी म्यूज़ियम बनाया जा रहा है, लेकिन शहर की पहचान बनाए रखने वाली अन्य ऐतिहासिक धरोहरों पर किसी विभाग का ध्यान नहीं है। तीन मोहरे गेट, जो पहले संवारा जा चुका है, एक बार फिर जर्जर होता जा रहा है। इसके अलावा बेनज़ीर महल, कई छोटे महल, मकबरे, बुलंद दरवाज़े और बावड़ियां बदहाल स्थिति में हैं और अतिक्रमण से घिरे हुए हैं।

उन्होंने मांग की कि यदि इन सभी धरोहरों का संरक्षण, सौंदर्यीकरण और सुरक्षा सुनिश्चित की जाए तो न केवल भोपाल की ऐतिहासिक पहचान मजबूत होगी, बल्कि पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और रोज़गार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
हाजी इमरान ने पुरातत्व विभाग, मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन बोर्ड और नगर निगम भोपाल से समन्वित प्रयास करने की अपील करते हुए कहा कि शहर की सैकड़ों ऐतिहासिक धरोहरें संरक्षण की प्रतीक्षा में हैं। यदि समय रहते इन पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाली पीढ़ियां इस अमूल्य विरासत से वंचित रह जाएंगी।
