विश्वनाथ मंदिर से चंद कदम की दूरी पर मांसाहारी होटल खुलने से लोगों की धार्मिक भावना को पहुंच रहा है ठेस, प्रशासन कटघरे में | New India TimesOplus_131072

गणेश मौर्य, वाराणसी (यूपी), NIT:

विश्वनाथ मंदिर से चंद कदम की दूरी पर मांसाहारी होटल खुलने से लोगों की धार्मिक भावना को पहुंच रहा है ठेस, प्रशासन कटघरे में | New India Times

बनारस की एक बरसों पुरानी प्रतिष्ठित दुकान की प्रतिष्ठा के साथ ही साथ लाखों लोगों की आस्था और विश्वसनीयता को एक शख़्स ने कटघरे में खड़ा कर दिया। बाबा विश्वनाथ की नगरी बेनिया नई सड़क पर स्थित लव कुश शुद्ध शाकाहारी के नाम को बदनाम करने की सोची समझी साजिश रची गई, बाबा विश्वनाथ मंदिर से चंद कदम दूरी पर लव कुश शुद्ध शाकाहारी होटल स्थित है शाकाहारी होटल के बगल एक मुस्लिम युवक ने मांसाहारी दुकान खोलकर अपनी दुकान चला रहा हैं, बताते चलें कि शिकायतकर्ता अभिषेक जायसवाल पुत्र गोपाल जायसवाल निवासी-डी 51/53 ए-2 सूरज कुण्ड लक्सा वाराणसी का स्थायी निवासी है ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांसाहारी दुकानदार पर कार्रवाई की मांग की है।
नई सड़क चौराहे पर स्थित बालगोविन्द कटरा जो कि मालिक ठाकुर बालगोविन्दा महाराज ट्रस्ट है उक्त कटरे में प्रतिष्ठित लवकुश रेस्टोरेन्ट का 70 वर्ष से अधिक रेस्टोरेंट संचालित है। उक्त रेस्टोरेन्ट अपने शाकाहारी भोजन के लिए स्थानीय नागरिकों, पर्यटकों व दर्शनार्थियों के बीच काफ़ी विख्यात है उक्त कटरे में ही आजम व इमरान नामक व्यक्तियों ने द्वेष की भावना रखते हुए मांसाहारी रेस्टोरेन्ट ‘दावते लजीज’ के नाम से खोल लिया है पूर्व में भी उक्त दोनों व्यक्तियों ने ‘गंगाकाशी’ नाम से लोगों व यात्रियों को भरमाने के नियत से रेस्टोरेन्ट भी खोला था जो कि 3 माह पूर्व ही बन्द हो गया तब से ही आजम व इमरान व्यापार को क्षति पहुँचाने के नियत से मांसाहारी रेस्टोरेन्ट खोल लिया है जबकि उक्त क्षेत्र में शासन द्वारा 2 किलोमीटर तक का क्षेत्र नानवेज के लिए प्रतिबन्धित किया गया है रेस्टोरेन्ट में आने वाले दर्शनार्थियों व यात्रियों पर गंदी धार्मिक टिप्पणियां करते है तथा झगड़ा-फसाद करने के लिए अमादा रहते है और यह जानते हुए कि रेस्टोरेन्ट में काशी विश्वनाथ मन्दिर में आने वाले यात्री बड़ी संख्या में आते है फिर भी रेस्टोरेन्ट में जाने वाले रास्ते पर मांसाहारी भोजन के अपशिष्टों को फेंक देते है जिससे श्रद्धालुओं और ग्राहकों के धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचती है। यात्री इस बात से सशंकित रहते है कि उक्त विपक्षीगणों द्वारा कभी किसी प्रकार का धार्मिक विवाद किया जा सकता है। उक्त विपक्षीगण तथा उनके आदमियों के द्वारा प्रतिदिन के यहाँ खाना खाने आने वाले ग्राहकों से लड़ाई झगड़ा करने का प्रयास किया जाता है।

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