छात्रों एवं बेरोजगार युवाओं की मन की बात कब सुनेगी सरकार, एनएसयूआई ने केंद्र और राज्य सरकार पर साधा निशाना | New India Times

अबरार अहमद खान/मुक़ीज खान, भोपाल (मप्र), NIT:

छात्रों एवं बेरोजगार युवाओं की मन की बात कब सुनेगी सरकार, एनएसयूआई ने केंद्र और राज्य सरकार पर साधा निशाना | New India Times

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 100वें एपिसोड का आज प्रसारण किया गया। चुनावी साल में मध्य प्रदेश बीजेपी जहां इस एपिसोड को प्रचारित करने में जुटी हुई है सरकारी खजाने से लाखों करोड़ों रुपए खर्च कर प्रचार प्रसार किया जा रहा है , वहीं कांग्रेस की छात्र संगठन एनएसयूआई ने कार्यक्रम को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर चौतरफा हमला शुरू कर दिया है। एनएसयूआई मेडिकल विंग के संयोजक रवि परमार ने पूछा है सरकार छात्रों और युवाओं की मन की बात कब सुनेगी।छ

छात्र नेता व एनएसयूआई मेडिकल विंग के प्रदेश संयोजक रवि परमार ने बयान जारी कर कहा, “मध्य प्रदेश में युवा और छात्र-छात्राएं सभी परेशान हैं। उनकी आवाज सुनने की बजाए मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार उनकी आवाज दबाने के लिए हर हथकंडा अपना रही है। हम पीएम मोदी, सीएम शिवराज और सभी मंत्रियों से कहना चाहते हैं कि मध्य प्रदेश की युवाओं और छात्र छात्राओं की आवाज कुचलने की बजाए अगर सुन लेंगे तो जगह जगह पर्दा लगाकर मन की बात जैसे कार्यक्रमों का आयोजन ही नहीं करना पड़ेगा।”

परमार ने आगे कहा, “मध्य प्रदेश के लाखों नर्सिंग छात्र छात्राएं परेशान हैं, क्योंकि तीन सालों से उनकी परिक्षाएं नहीं हुई मध्यप्रदेश की लाडली भांजियां एवं भांजे सिसक रहे है और उनके परिजन भविष्य को लेकर अत्यधिक चिंतित हैं लेकिन मध्य प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री उनकी आवाज सुनने की बजाए आवाज दबाने के लिए छात्राओं पर लाठीचार्ज करवा कर जेल तक भिजवा देते हैं। नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़े की वजह से मध्य प्रदेश के लाखों स्टूडेंट्स का भविष्य अंधकार में है, लेकिन सत्ता में बैठे लोग मौज उडा रहे हैं।”

परमार ने आगे कहा, “पीएम मोदी हर साल दो करोड़ युवाओं को रोजगार देने का वादा किया था। नौ साल में लगभग 18 करोड़ युवाओं को रोजगार मिलना था। आबादी के अनुसार मध्य प्रदेश के 60 लाख युवाओं को रोजगार मिलना था। लेकिन मिला कुछ भी नहीं।
अपने मन की बात में इसके बारे में कुछ नहीं कहते। वहीं मध्य प्रदेश के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी पिछले 11 दिनों से अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर बैठे हुए हैं। पूरे मध्यप्रदेश में 32 हजार से ज्यादा संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी हैं, जिनकी मन की बात कोई सुनने वाला कोई भाजपा नेता और कार्यकर्ता नहीं।”

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