शिक्षा ऋण की प्रक्रिया सरल और 15 दिन में निपटाने की मांग, पालक महासंघ ने प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन | New India Times

मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

देशभर के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए समय पर शिक्षा ऋण उपलब्ध कराने तथा ऋण प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की मांग को लेकर पालक महासंघ, जिला इकाई बुरहानपुर ने प्रधानमंत्री के नाम डिप्टी कलेक्टर बुरहानपुर राजेश पाटीदार को ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन के संबंध में जानकारी देते हुए पालक महासंघ बुरहानपुर के वरिष्ठ सदस्य राजीव खेडकर ने कहा कि देश के लाखों विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिए शिक्षा ऋण पर निर्भर हैं। लेकिन ऋण स्वीकृति में देरी, जटिल दस्तावेजी प्रक्रिया, बार-बार बैंक के चक्कर और विभिन्न औपचारिकताओं के कारण विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों को आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार ऋण स्वीकृत होने में देरी के कारण विद्यार्थियों के प्रवेश की समय-सीमा भी प्रभावित होती है।

महासंघ के जिला अध्यक्ष धर्मेंद्र सोनी ने द इकोनॉमिक टाइम्स में प्रकाशित समाचार का हवाला देते हुए कहा कि वित्त मंत्रालय द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को शिक्षा ऋण आवेदनों का 15 दिनों के भीतर निपटारा करने तथा प्रक्रिया को सरल एवं पारदर्शी बनाने के निर्देश दिए गए हैं। पालक महासंघ ने मांग की कि इन निर्देशों का प्रभावी एवं सख्ती से पूरे देश में पालन सुनिश्चित किया जाए।

महासंघ के वरिष्ठ सदस्य रियाजउल हक़ अंसारी ने कहा कि प्रतिभा आर्थिक स्थिति की मोहताज नहीं होनी चाहिए। यदि किसी प्रतिभाशाली विद्यार्थी को केवल समय पर शिक्षा ऋण नहीं मिलने के कारण उच्च शिक्षा में प्रवेश से वंचित होना पड़ता है, तो यह विद्यार्थी और उसके परिवार के साथ-साथ देश के भविष्य के लिए भी नुकसानदायक है।

पालक महासंघ की प्रमुख मांगें

– देश के सभी बैंकों में शिक्षा ऋण के लिए एक समान, सरल एवं पारदर्शी प्रक्रिया लागू की जाए।
– प्रत्येक शिक्षा ऋण आवेदन का अधिकतम 15 दिनों में अनिवार्य रूप से निपटारा किया जाए।
– ऋण अस्वीकृत होने की स्थिति में विद्यार्थी को लिखित एवं स्पष्ट कारण उपलब्ध कराया जाए।
– प्रत्येक बैंक शाखा में शिक्षा ऋण के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए।
– आर्थिक रूप से कमजोर एवं मध्यमवर्गीय परिवारों के विद्यार्थियों के लिए दस्तावेजी प्रक्रिया सरल की जाए।
– शिक्षा ऋण संबंधी शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए जिला एवं राज्य स्तर पर प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था बनाई जाए।

पालक महासंघ ने केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक, भारतीय बैंक संघ तथा सभी बैंक प्रबंधन से आग्रह किया कि शिक्षा ऋण को महज बैंकिंग सुविधा के रूप में नहीं, बल्कि देश के भविष्य में निवेश के रूप में देखा जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी विद्यार्थी केवल आर्थिक कठिनाइयों अथवा ऋण प्रक्रिया में देरी के कारण उच्च शिक्षा से वंचित न हो।

शिक्षा ऋण की पात्रता और प्रक्रिया को लेकर उठाए सवाल

महासंघ की ओर से यह भी कहा गया कि शिक्षा ऋण की पात्रता, दस्तावेजी प्रक्रिया और ऋण चुकौती की शर्तों को लेकर विद्यार्थियों एवं अभिभावकों में कई तरह की भ्रांतियां हैं। संगठन ने मांग की कि बैंकों द्वारा शिक्षा ऋण की पात्रता, ब्याज, दस्तावेज, स्वीकृति की समय-सीमा और पुनर्भुगतान की शर्तों की स्पष्ट एवं सरल जानकारी आवेदकों को उपलब्ध कराई जाए।

महासंघ के प्रतिनिधियों के अनुसार, नौकरीपेशा लोगों की तुलना में श्रमिक एवं असंगठित क्षेत्र से जुड़े परिवारों के विद्यार्थियों को शिक्षा ऋण प्राप्त करने में अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। महासंघ ने मांग की कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों के लिए ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए, जिससे केवल अभिभावक की नौकरी या आय के आधार पर किसी प्रतिभाशाली विद्यार्थी को शिक्षा ऋण से वंचित न होना पड़े।

ज्ञापन सौंपने के दौरान अता उल्लाह खान, देवचंद शर्मा, विनय पुनीवाला, राज़ीक हुसैन अंसारी, बसंत पाल, नंदकिशोर वाने, राजकुमार बचवानी, परेश शाह, नरेश हासानंदानी, राजेश भगत सहित पालक महासंघ के पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।

By nit

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