अबरार अहमद ख़ान/मुकीज खान, भोपाल (मप्र), NIT:

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़ा मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। उच्च न्यायालय ने एमपी नर्सिंग काउंसिल की रजिस्ट्रार सुनीता सीजू को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट के इस फैसले ने मध्यप्रदेश एनएसयूआई के उस ज्ञापन पर मुहर लगा दी है, जिसमें एनएसयूआई ने विगत कुछ दिनों पूर्व ही चिकित्सा शिक्षा मंत्री को संबोधित ज्ञापन में सुनीता सीजू को रजिस्ट्रार पद के लिए अयोग्य करार देते हुए हटाने की मांग की थी।
मध्य प्रदेश में फर्जी तरीके से खुले नर्सिंग कॉलेजों को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। एमपी लॉ स्टूडेंट्स यूनियन द्वारा दायर इस याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई। एडवोकेट विशाल बघेल ने सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया कि प्रदेश में फर्जी तरीके से कई नर्सिंग कॉलेज चल रहे हैं। उच्च न्यायालय ने इस मामले में रजिस्ट्रार की भूमिका को संदिग्ध मानते हुए उन्हें पद से हटाने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने कहा है कि फिलहाल प्रशासक के हाथ में नर्सिंग कॉउंसिल का काम रहेगा।

मध्यप्रदेश एनएसयूआई मेडिकल विंग के संयोजक रवि परमार ने हाईकोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने बताया कि पिछले साल 24 सितंबर को जब सुनीता सीजू की नियुक्ति हुई थी तो एनएसयूआई ने सबसे पहले इसका विरोध किया था। हमने चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त को पत्र लिखकर उन्हे हटाने की मांग की थी और उन्हें बताया था कि वे रजिस्ट्रार पद के लिए अयोग्य हैं। हमने ये भी बताया था कि उनकी नियुक्ति मध्यप्रदेश के नर्सिंग छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं।
परमार के मुताबिक तब जिम्मेदार प्रदाधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। जब मामला कोर्ट में आया तो तब भी शासन की ओर से उन्हें पद पर बनाए रखने की भरपूर कोशिशें हुई। हालांकि, कोर्ट ने उनकी भूमिका को संदिग्ध मानते हुए उन्हें हटाने का आदेश दिया है। हम माननीय उच्च न्यायालय के इस फैसले का स्वागत करते हैं.
परमार ने कि बताया कि अत्यधिक भय में वो नर्सिंग कॉलेज संचालक हैं जिनसे रजिस्ट्रार सुनिता शिजू द्वारा वसूली की जा रही थी एनएसयूआई जल्दी ही उनकी संपत्ति की जांच के लिए आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ( EOW ) में शिकायत करेंगी श।
