रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

शासकीय उत्कृष्ट बालक प्राथमिक विद्यालय झकनावदा में सोमवार को सावित्रीबाई फुले को याद किया गया। वहीं स्कूली छात्रों को शिक्षक हेमेंद्र जोशी द्वारा बताया कि भारत की पहली शिक्षिका जिन्होंने खोला लड़कियों के लिए देश का पहला स्कूल। वही सावित्रीबाई फुले के चित्र पर शिक्षक हेमेंद्र जोशी, मनीष कुमट (जैन), बबलू मांडोत पालक संघ अध्यक्ष फकीर चंद माली, जन शिक्षक पूनम चंद कोठारी, एवं स्कूल स्टाफ श्रीमती मोनू सोलंकी, सुश्री दीपिका माली, सुश्री शिवानी चौहान, सुश्री रितिका माली द्वारा पुष्पमाला एवं धूप दीप प्रज्वलित किया गया। बाद शिक्षक जोशी सावित्रीबाई फुले का परिचय कराते हुए छात्रों को बताया कि सावित्रीबाई फुले महज 9 वर्ष की थी और उनका विवाह 13 वर्ष के ज्योति राव फूले से कर दिया गया था। जिस समय सावित्रीबाई फुले की शादी हुई थी उस समय वह अनपढ़ थी। वही उनके पति तीसरी कक्षा में पढ़ते थे। जिस समय सावित्रीबाई पढ़ने का सपना देख रही थी उस समय लड़कियों के साथ बहुत भेदभाव होता था। 1 दिन सावित्री अंग्रेजी की एक किताब के पन्नों को पलट रही थी तो उनके पिता ने देख लिया। वह दौड़ कर उनके पास आया और किताब को उनसे छीन कर फेंक दिया। उसके पीछे यह वजह बताएं कि शिक्षा का हक केवल पुरुषों का है। और महिलाओं को शिक्षा ग्रहण करना पाप है। इस घटना के बाद सावित्रीबाई किताब को वापस लेकर आई और प्रण किया कि कुछ भी हो जाए पढ़ना जरूर सिखेगी। और उनका आखिरकार सपना पढ़ लिखकर साकार हुआ वह भारत की पहली शिक्षिका के रूप में उभर कर सामने आई।
