औरंगाबाद में अखिल भारतीय मुशायरा संपन्न, उर्दू भाषा और साहित्य के विकास में शहर की भूमिका अविस्मरणीय: डॉ. महताब आलम | New India Times

मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

कैंटोनमेंट उर्दू एजुकेशन सोसाइटी के अधीन संचालित एडेड उर्दू प्राथमिक एवं उच्च विद्यालय, छावनी, औरंगाबाद द्वारा आठवाँ वार्षिक सम्मेलन परंपरागत ढंग से धूमधाम और गरिमा के साथ मनाया गया। अजंता भवन में आयोजित इस समारोह में नगर के गणमान्य नागरिकों, शिक्षाविदों, उर्दू के प्रतिष्ठित शायरों और अदीबों ने बड़ी संख्या में सहभागिता की और कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।

वार्षिक उत्सव के अवसर पर एक गरिमामय अखिल भारतीय मुशायरे का आयोजन किया गया, जिसमें देश के प्रसिद्ध शायरों ने भाग लेकर अपनी उत्कृष्ट रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

छावनी स्थित अजंता भवन में आयोजित इस समारोह की अध्यक्षता शिक्षाविद एवं प्रख्यात समाजसेवी अशफाक खान ने की। विशेष अतिथि के रूप में जनाब शोएब ख़ुसरो (संपादक, औरंगाबाद टाइम्स) उपस्थित रहे। अन्य विशिष्ट अतिथियों में डॉ. हामिद चाउसा (अध्यक्ष, अल्पसंख्यक विभाग मराठवाड़ा), डॉ. एम. ए. बारी (सेवानिवृत्त उप-प्राचार्य, मौलाना आज़ाद कॉलेज, औरंगाबाद), अधिवक्ता आसिम शेख (एल.एल.एम., औरंगाबाद उच्च न्यायालय), मेअराज खान (नगरसेवक, औरंगाबाद नगर निगम), विवेक जाधव (पी.आई., छावनी पुलिस स्टेशन), उपाध्यक्ष उमर खान (उर्दू प्राथमिक विद्यालय, छावनी) तथा खलील सर प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

विद्यालय के वार्षिक उत्सव कार्यक्रम का शुभारंभ छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत राष्ट्रीय गीत एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों से हुआ, जिसकी श्रोताओं ने मुक्तकंठ से प्रशंसा की। विद्यार्थियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए उन्हें राष्ट्र का भविष्य और कर्णधार बताया गया।

वार्षिक उत्सव के अवसर पर आयोजित अखिल भारतीय मुशायरा समाजसेवी अशफाक खान के नाम समर्पित किया गया। “एक शाम अशफाक खान के नाम” शीर्षक से आयोजित इस मुशायरे की अध्यक्षता बुरहानपुर के प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त शायर नईम अख्तर खादिमी ने की, जबकि भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार एवं शोधकर्ता डॉ. महताब आलम ने मंच संचालन किया।

डॉ. महताब आलम ने उर्दू भाषा और साहित्य के विकास में औरंगाबाद की ऐतिहासिक भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि यह वही धरती है जहाँ वली औरंगाबादी का जन्म हुआ और उन्होंने उर्दू शायरी के कारवाँ की आधारशिला रखी। उनके उत्तराधिकारी सिराज औरंगाबादी ने अपनी काव्य प्रतिभा से उर्दू साहित्य को नई ऊँचाइयाँ दीं। इसके अलावा उर्दू की प्रथम साहिब-ए-दीवान शायरा लुत्फुन्निसा इम्तियाज़ का संबंध भी इसी धरती से रहा है।

उन्होंने बताया कि एडेड उर्दू प्राथमिक विद्यालय की स्थापना वर्ष 1931 में हुई थी और तब से यह विद्यालय उर्दू शिक्षा, भाषा संरक्षण एवं संवर्धन में महत्वपूर्ण योगदान देता आ रहा है।

मुशायरे से पूर्व विद्यालय प्रशासन एवं प्रबंधन समिति की ओर से शायरों और अतिथियों का शॉल और पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया। कार्यक्रम का संचालन विद्यालय के शिक्षक शोएब खान ने किया।

मुशायरे का शुभारंभ डॉ. खालिद नैयर की नात-ए-पाक से हुआ। इसके पश्चात इमरान फारिस ने अपनी प्रस्तुति से समा बाँधा। मुशायरे के संयोजक उमर आज़मी ने अपनी प्रस्तुति से कार्यक्रम को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया।

अखिल भारतीय मुशायरे में डॉ. महताब आलम (भोपाल), नईम अख्तर खादिमी (बुरहानपुर), उमर आज़मी (जलगाँव), शऊर आश्ना (बुरहानपुर), तारिफ़ नियाज़ी (मुंबई), मन्नान फ़राज़ (जबलपुर), मुशीर अंसारी (मुंबई), डॉ. खालिद नैयर (अमरावती), यूसुफ़ यलगार (मुंबई) तथा इमरान फारिस (जलगाँव) ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।

इस अवसर पर विद्यालय की प्राचार्या अमरीन अख्तर ने सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे साहित्यिक एवं शैक्षिक कार्यक्रम विद्यार्थियों में आत्मविश्वास और जागरूकता बढ़ाते हैं। उन्होंने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए मुशायरे को अगले वर्ष तक स्थगित करने की घोषणा की।

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