संदीप शुक्ला, इंदौर( मप्र ), NIT;
हिस्ट्रीशिट्रों की आर्थिक स्थिति का अध्यन कर उस पर स्वार्थ और शंका से ऊपर उठ कर वैधानिक कार्यवाही की हमारे शहर को लगभग 20 वर्षो से प्रतीक्षा है। इस दरमियान शौर्यवान कुछ आला अधिकारियों की सरहानीय कार्यवाहियां शहर के अनुभव में आज भी है। बहरहाल समस्या के विपरीत समाधान खोजने वालों की दोहरी नीति और विभाग के मौखिक आदेश के फलस्वरूप विवेचनाओं के प्रतिवेदन वर्षों से फाइलों में ही दफ़न हैं। आम नागरिकों की मानें तो बदमाशों की आमदनी की पुलिध विवेचना होने से शहर भर के अवैध व्यवसायियों पर पुलिस विभाग की सार्थक कार्यवाही स्वमेव संम्भव है। कहा जा रहा की यह कार्यवाही बिना किसी राजनीतिक दबाव के होगी। इस के मायने पूर्व में जिन आलाधिकारियों ने सितारों और महान अशोक के सिम्बल की गरिमा को धूमिल किया है, उनकी भी क्लास लगना संम्भव लगता है।
