रहीम शेरानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

कोरोना वायरस की महामारी और लाक डॉउन को मद्देनजर रखते हुए मुस्लिम समाज के वरिष्ठजनों, इमाम साहबान एवं सभी की सहमति से ये निर्णय लिया गया है कि इस्लाम धर्म में शब-ए-बारात की रात पूर्वजों को याद करता है और कब्रिस्तान जाकर पूर्वजों की कब्र पर फूल अर्पित कर दुआ मांगी जाती है।

इस बार दिवंगत परिजनों को याद करने का दिन शब-ए-बारात 9 अप्रैल गुरुवार आज है। कोरोना वायरस संक्रमण के खतरे को देखते हुए मुस्लिम समाज के लोग इस बार कब्रिस्तान और मस्जिदों में नहीं जाएंगे बल्कि अपने ही घर पर रहकर दरूद शरीफ पढ़ फातिहा लगा कर ईसाले सवाब पेश करेंगे और घर पर ही अपने पूर्वजों को याद करेंगे। लाक डॉउन का पालन करेंगे और शासन -प्रशासन का सहयोग करेंगे और इस भयंकर बीमारी से बचने के लिए घर पर ही रहेंगे साथ ही मुस्लिम समाज ने सभी से भी अपील की है कि घर पर ही रहें स्वस्थ रहें।
