मकसूद अली, यवतमाल ( महाराष्ट्र ), NIT;
किसानों की समस्याओं के प्रति शासन गंभीर नहीं है, कर्ज माफी हो या किसानों के माल के दाम, शासन ध्यान नहीं देती है। किसानों की आत्महत्याएं बढ रही हैं लेकीन मुख्यमंत्री केवल आश्वासन दे रहे हैं। सत्ताधारीयों ने नींद का बहाना किया है, अब उन्हें निंद से जगाने का समय आ गया है। ऐसी टिपणी आमदार बच्चू कडू ने सभा में की है। यवतमाल के बचत भवन में 12 अप्रैल को आसुड (चाबुक ) यात्रा के अवसर पर वे किसान दरबार में बोल रहे थे।
इस समय प्रहार जनशक्ती पक्ष के आमदार बच्चू कडू, शेतकरी संघटन के कार्याध्यक्ष कालिदास आपेट, विदर्भ प्रमुख प्रसिद्ध कादंबरीकार दिनकर दाभाडे, प्रहार के जिल्हाध्यक्ष प्रमोद कुदळे आदी उपस्थित थे। आगे बोलते हुए उन्होंने कहा की पंतप्रधान नरेंद्र मोदी चुनाव के पहले आर्णी तहसील के दाभडी गांव में अाए थे।किसानों को खर्च की तुलना में ज्यादा दाम हमी देगे,, स्वामीनाथन आयोग लागू करेंगे, ऐसे कई आश्वासन दिए थे। इसके बाद किसानों ने भी उनपर भरोसा जताया। लेकीन तीन वर्ष में उन्होंने किसानों की निराशा ही दी है। राज्य में भी भारतीय जनता पक्ष की सत्ता है। ऐसा होते हुए भी किसानों को कर्जमाफी देना जरूरी है। यह निर्णय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस लेंगे एसा बता रहे हैं। चुनकर आने के बाद किसानों को किनारे रख अन्य बातों पर अधिक जोर दिया जा रहा है।
भारतीय स्टेट बैंक की अध्यक्षा अरूंधती भट्टाचार्य, रिजर्व बैंक के गव्हर्नर उर्जित पटेल, नाबार्ड के अध्यक्ष हर्षकुमार भनवाला ने कर्जमुक्ती का विरोध मोदी के कहने पर किया है, ऐसा आरोप भी रघुनाथ दादा पाटील ने लगाया है।इस अवसर पर दिनकर दाभाडे ने मार्गदर्शन किया। सभा का संचालन प्रहार के जिल्हाध्यक्ष प्रमोद कुदळे ने किया। इस ससभा में मंगेश देशमुख, मुन्ना बोंडे, बसू महाराज, प्रदीप वडलकर, दत्ता पाकधणे, धनंजय टाकळे, प्रा. प्रवीण देशमुख, नितीन मिर्झापुरे, अंकुश वानखडे, हंसराज सोमवंशी, तुषार भोयर, राहुल झाडे, संजय भगत, आकाश समोसे, उमेश गावंडे, स्वप्नील उजवने, गोपाल काकडे, वैभव रणधीवे, धिरज सोनटक्के, सचिन इंगोले, आकाश गावंडे, आदि समेत सैकड़ों किसान उपस्थित थे। इस यात्रा का समापन 21 अप्रैल को प्रधानमंत्री मोदी के गुजरात राज्य के वडनगर में होगा। यहाँ आत्महत्या किए किसानों को रक्तदान कर आदरांजली अर्पीत की जाएगी।
