कांग्रेस के सम्मेलन में छलका कांग्रेसियों का दर्द, संगठन के मामला में निर्दलीय विधायक पर लगाया हस्तक्षेप करने का आरोप, प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री और बुरहानपुर के प्रभारी मंत्री को एक स्वर में बदलने की उठी मांग | New India Times

मेहलक़ा अंसारी, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

कांग्रेस के सम्मेलन में छलका कांग्रेसियों का दर्द, संगठन के मामला में निर्दलीय विधायक पर लगाया हस्तक्षेप करने का आरोप, प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री और बुरहानपुर के प्रभारी मंत्री को एक स्वर में बदलने की उठी मांग | New India Times

सिंधी बस्ती रोड पर स्थित हुसैन मैरिज हॉल में ज़िला कांग्रेस कमेटी का हंगामेदार सम्मेलन सम्पन्न हुआ। कांग्रेस पार्टी की ओर से भेजे गए दो पर्यवेक्षक सर्वश्री एनपी जोशी और हिम्मत पटेल को कांग्रेसी कार्यकर्ताओं, कांग्रेसी नेताओं और कांग्रेसी पदाधिकारियों ने न केवल खरी खोटी सुनाई बल्कि हंगामी हालात के कारण पर्यवेक्षक को बोलने का पर्याप्त अवसर भी नहीं मिला। जिलाध्यक्ष अजय सिंह रघुवंशी ने संक्षिप्त में अपनी बात रखते हुए कहा कि 15 साल तक सड़कों पर उतर कर हमने लाठियां खाई हैं, दरी उठाई, केस बनवाए, सरकार बनी तो संगठन से जुड़े लोगों को भूल गए नेता गण। अजय सिंह रघुवंशी के अनुसार जब भी सरकार का कोई मंत्री बुरहानपुर आए तो वह संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से बात करे, मंत्री के सेल्फी खिंचवाने से शहर की तरक्की नहीं होगी।अजय सिंह रघुवंशी के अनुसार अगर कांग्रेसी कार्यकर्ताओं की अनदेखी जारी रही तो आने वाले चुनाव में कांग्रेस का सफाया हो जाएगा। इस सम्मेलन में पूर्व विधायक हमीद क़ाज़ी, हाजी मोहम्मद इकराम अंसारी गब्बू सेठ, एडवोकेट राजेश कोरा वाला, एडवोकेट हनीफ खान और उबैदुल्ला आदि ने भी पार्टी पर्यवेक्षक को खरी खोटी सुनाते हुए एक सुर और एक आवाज़ में बुरहानपुर के प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट को बदलकर उनकी जगह कृषि मंत्री सचिन यादव को प्रभारी मंत्री बनाने की मांग करते नजर आए। पूर्व विधायक हमीद क़ाज़ी ने भी निर्दलीय विधायक ठाकुर सुरेंद्र सिंह शेरा भैया पर संगठन के मामलों में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया। एक कांग्रेसी कार्यकर्ता ने जिले के प्रभारी मंत्री पर सिर्फ “वसूली” के लिए बुरहानपुर आने का आरोप लगाया।

सम्मेलन में जिला कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष किशोर महाजन, शाहपुर के पूर्व विधायक रविंद्र महाजन, गौरी दिनेश शर्मा, सरिता राजेश भगत, जसलीन कीर, राजेश भगत, दिनेश शर्मा, अक़ील औलिया, इस्माइल आलम सेठ, दगडू चौकसे आदि मौजूद थे। हंगामे के दौरान पत्रकारों को सम्मेलन से बाहर कर दिया गया था लेकिन इसके बावजूद पत्रकारों ने गुप्त ढंग से अपने कैमरे चालू रख कर हंगामे को कवर किया और हंगामे को जनता के सामने पेश किया।

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