दतिया जिले में भी कड़कनाथ मुर्गा पालन के लिए कृत्रिम विधि से चूज़े किये जा रहे हैं तैयार, जिले में कड़नाथ मुर्गा पालन व्यवसाय में हो सकती है बढ़ोत्तरी | New India Times

पवन परूथी/गुलशन परूथी, दतिया (मप्र), NIT:

दतिया जिले में भी कड़कनाथ मुर्गा पालन के लिए कृत्रिम विधि से चूज़े किये जा रहे हैं तैयार, जिले में कड़नाथ मुर्गा पालन व्यवसाय में हो सकती है बढ़ोत्तरी | New India Times

राज्य सरकार की पहल पर दतिया जिले में कड़कनाथ (मुर्गा) उद्योग को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे यह अंचल कड़कनाथ उद्योग के एक प्रमुख केन्द्र के रूप में उभर सकता है। इस इलाके में कड़कनाथ के रूप में उन्नत नस्ल की मुर्गियों की संख्या बढ़ाने के लिए आत्मा परियोजना के सहयोग से दतिया के कृषि विज्ञान केन्द्र में शुरू हुए एक प्रोजेक्ट के तहत कृत्रिम विधि से इनके चूजों को उत्पन्न किया जा रहा है।

यह केन्द्र डेढ़ साल पहले इस पर काम शुरू कर चुका है। केन्द्र के पशु वैज्ञानिक डाॅ. रूपेश जैन ने बताया कि दतिया जिले में कड़कनाथ मुर्गा उद्योग के विकास के लिए सबसे ज्यादा जोर कृत्रिम विधि से कड़कनाथ चूजों के उत्पादन के बुनियादी विकास पर दिया जा रहा है। इसके तहत मशीन के जरिए कृत्रिम विधि से अधिक से अधिक चूजों का उत्पादन लेकर किसानों को मुहैया कराने पर जोर दिया जा रहा है। डाॅ. जैन के मुताबिक अब तक जिले के छः किसानों को कड़कनाथ के चूजे उपलब्ध कराए जा चुके हैं, जो इनसे अच्छा मुनाफा प्राप्त कर रहे हैं। एक कड़कनाथ मुर्गा एक हजार से लेकर बारह सौ रूपये में बिकता है।

डाॅ. जैन के मुताबिक कड़कनाथ भारत में मिलने वाली एकमात्र कालामासी मुर्गे की नस्ल है। यह भील और भिलाला जनजातीय समुदायों द्वारा पाला हुआ मध्य प्रदेश का एक देशी पक्षी है। कड़कनाथ सामान्यतः मुख्य रूप से जेट ब्लैक, पेन्सिल एवं सुनहरा प्रजाति में उपलब्ध है।

कड़कनाथ में प्रोटीन 25 प्रतिशत से अधिक होती है, जबकि अन्य मुर्गियों में 18-20 प्रतिशत के बीच होती है। कड़कनाथ में कोलेस्ट्रोल अन्य सफेद मांसी चिकन की तुलना में बहुत कम यानि 0.73-1.05 प्रतिशत होता है। इसका मांस मानव के लिए उपयुक्त 8 से 18 एमिनो एसिड के उच्चस्तर से परिपूर्ण होता है तथा इसके मांस में विटामिन बी-1, बी-2, बी-6, बी-12 विटामिन सी, विटामिन ई नियासीन एवं प्रोटीन वसा, कैल्शियम, फास्फोरस, लोहा और निकोटोबीक एसिड भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।

कड़कनाथ होम्योपैथी चिकित्सा एवं तंत्रिका विकार में विशेष औषधीय मूल्यों का काम करता है। यहां के आदिवासी लोग इसके रक्त का उपयोग पुरातन/चिरकालीन गंभीर रोगों के सुधार में करते हैं और यहां के मनुष्य इसके मांस का उपयोग ताकत बढ़ाने के लिए करते हैं। कड़कनाथ चिकन महिलाओं के बांझपन, असामान्य मासिक धर्म, अभ्यस्त गर्भपात के उपचार में एक अजीब प्रभावकारी है।

कड़कनाथ अंडा एक पूर्ण आहार है और दूध मांस की भांति अण्डे से प्रोटीन बहुत बड़ी मात्रा में प्राप्त होती है। इसमें चर्बी और खनिज भी पर्याप्त मात्रा में होते हैं। जिसे छोटे-छोटे बच्चे भी आसानी से पचा लेते हैं। अंडे में फैटी एसिड अतिरिक्त शरीर के लिए आवश्यक तत्व लोहा, कैल्शियम, फास्फोरस एवं अन्य खनिज पदार्थ भी प्राप्त होते हैं।

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