नरेंद्र इंगले, ब्यूरो चीफ, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:
19 मई के सातवें चरण की 59 सीटों के मतदान के बाद 2019 लोकसभा आम चुनावों के सभी चरण समाप्त हो गए हैं। उत्तर प्रदेश के बाद सबसे अधिक 48 सीटों वाले राज्य महाराष्ट्र के चुनाव चार चरण में संपन्न हो चुके हैं। इन सभी चरणों में 2014 के मुकाबले मतदान प्रतिशत में 5 से 8 फीसदी तक की भारी गिरावट देखी गयी है। उत्तर महाराष्ट्र की कुल 8 सीटों में प्रमुख रुप से धुलिया, नंदुरबार जलगांव और रावेर की 4 सीटें हैं, इन चारों पर वर्तमान में भाजपा का कब्जा है। इस चुनाव में जलगांव तथा रावेर की बात करें तो यह साफ़ देखा जा सकता कि इन दोनों सीटों पर संमिश्र नतीज आना तय माना जा रहा है। भाजपा द्वारा उठाया गया राष्ट्रवाद तथा मोदीकेंद्रीत प्रचार का कोई असर इन सीटों पर नहीं दिखायी पड़ रहा है। पुर्व मंत्री तथा जनपद में भाजपा के अभिभावक के तौर पर परिचित एकनाथ खडसे को दरकिनार कर निकाय चुनावों में भाजपा को चमत्कारी जीत दिलाने वाले जलसंपदा मंत्री गिरीश महाजन को पार्टी ने उत्तर महाराष्ट्र का प्रभारी बनाया है। महाजन के मैजिक पर सहयोगी शिवसेना ने लोकतांत्रीक तरीके से टोटके भी किए थे जिसके बाद दो खेमों में बंट चुकी भाजपा के भीतर खडसे – महाजन के छदम युद्ध का जनता ने लगातार अनुभव लिया है बावजुद इसके प्रतिकुल परिस्थिति में भी खडसे के व्यक्तीगत प्रभाव के चलते यह साफ़ नजर आ रहा है कि रावेर की सीट जीतने में भाजपा को कोई मशक्कत नहीं करना पडेगी। वहीं जलगांव सीट के लिए वर्तमान सांसद ए टी पाटील का टिकट कांटने के बाद मचे बवाल के बाद घोषित प्रत्याशी श्रीमती स्मिता वाघ का अचानक काटा गया टिकट इन दोनों सोचे समझे हादसों से पार्टी के अंदर उफ़ान पर आयी गुटबाजी ने भाजपा पर इतना कहर बरपाया कि भाजपा के आधिकारीक प्रत्याशी उन्मेष पाटील के प्रचार के लिए अमलनेर में संपन्न पार्टी संमेलन के दौरान मचे फ्रीस्टाईल के बीच बचाव में उतरे चुनाव प्रभारी महाजन को भी कार्यकर्ताओं के लाथ घूसों का सामना करना पडा था। पार्टी की इस विकट स्थिती पर भाजपा से किनारे किए गए एकनाथ खडसे ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। भाजपा में मचे इस घमासान से जलगांव सीट से कांग्रेस – राष्ट्रवादी गठबंधन के प्रत्याशी गुलावराव देवकर का पलडा काफ़ी भारी हो गया है। इन दोनों संसदीय सीटों में शामील विधानसभाओं में शिवसेना भाजपा के साथ तो है लेकिन मुकदर्शक कि भुमीका मे ! वैसे भी जातीगत समीकरण कि चिकित्सा कि जाने के बाद यह साफ़ प्रतित होता है कि रावेर मे बहुसंख्यांक लेवा पाटीदार समाज के नेता एकनाथ खडसे को अपने एक साल के मंत्रीपद के बाद जिस तरह राज्य मंत्रीमंडल से बाहर किया गया था उससे पाटीदारो कि अस्मिता को गहरी ठेस पहुची है लेकिन बतौर सामाजिक नेता वह खडसे के साथ कायम है ! वहि जलगांव सिट जो मराठा समुदाय के तबके कि प्रभावी मौजुदगी से परीचीत है वहा से भी किसी मराठा को राज्य मंत्री मंडल में शामील करने के बजाय अल्पसंख्यांक समुदाय से आने वाले शिवसेना के गुलाबराव पाटील को राज्यमंत्री बनाया गया। विशेष बात यह है कि गिरीश महाजन भी इसी समुदाय से आते है! स्वाभावीक रुप से यहा भी मराठा समुदाय की सामाजिक अस्मिता को क्षति पहुंचाई गयी। वर्तमान सांसद ए टी पाटील पर हुए अन्याय ने लोगों में असंतोष को अधिक तीव्र बना दिया है। इन दोनों संसदीय सीटों पर बहुसंख्यक पाटीदार और मराठा समाज को भाजपा ने नेतृत्व का शीर्ष मौका नहीं दिया। कुल मिलाकर सामाजिक अस्मिता के इसी मुद्दे पर ही इन दोनों सीटों के नतीजे आना तय है। 23 मई को रावेर में भाजपा की रक्षा खडसे की जीत पक्की है वहीं भाजपा के गढ़ जलगांव में देवकर के रुप में राष्ट्रवादी कांग्रेस का गुलाब खिलना सुनिश्चित है।
