हाशिम अंसारी, ब्यूरो चीफ, सीतापुर (यूपी), NIT:

गेटमैन की थोड़ी सी लापरवाही कई लोगों के जान पर भारी पड़ सकती थी लेकिन लोगों की जागरूकता से बड़ा हादसा होते होते बच गया।
मिली जानकारी के अनुसार बीते दिवस शाम लगभग साढे पांच बजे एक ट्रायल पीला रेल इंजन जिसमें एक बोगी भी लगी थी सीतापुर से लखीमपुर रन थ्रू तेज रफ्तार से जा रही थी कि उसी समय हरगांव – पिपरझला मार्ग पर विकास खण्ड हरगांव के समीप स्थित रेलवे क्रासिंग का गेट (बैरियर) बंद न होने के कारण बडा हादसा होते बचा।
गेटमैन की लापरवाही के कारण रेलवे फाटक बन्द नहीं किया गया और व्यस्त मार्ग होने के कारण उस पर प्रति क्षण ट्रैक्टर-ट्रालियों सहित वाहन पास होते रहे।
बीते दिवस ट्रायल पीला रेल इंजन जिसमें एक बोगी भी लगी थी सीतापुर से लखीमपुर रन थ्रू तेज रफ्तार से जा रही थी दूसरी ओर गेटमैन की लापरवाही के चलते रेलवे क्रासिंग बन्द नहीं करने के कारण ट्रैक्टर ट्रालियां व कारें इधर से उधर पास हो रही थी कि उसी समय एक गन्ने से लदी ट्रैक्टर-ट्राली रेलवे फाटक से निकल रही थी कि तभी उसने मौत के रूप में तीव्र गति से रेल गाड़ी को सामने से आते देखा, माजरा देख घबरा कर चालक ने तुरन्त ट्रैक्टर में बैक गेर लगाकर ट्रैक्टर -ट्राली को पीछे की ओर खींच लिया ट्राली को पीछे की ओर खींचने के कारण पीछे खड़ी कार से ट्राली टकरा गई जिससे कार के शीशे टूट गये लेकिन बड़ा हादसा होते होते बच गया।
इस सम्बन्ध में जब गेटमैन से बात की गयी तो उसने बताया कि गेट बन्द करने के बाबत मुझे कोई आदेश नहीं मिला था। अब सवाल इस बात का है कि क्या गेटमैन का स्वयं विवेक शून्य हो गया था और यदि घटना घटित हो जाती तो जिम्मेदारी किसकी होती?
