NIT Exclusive: 2 करोड़ 75 लाख रुपये की योजना का बंटाधार करने वाले विभाग को 1 करोड़ 25 लाख रुपये और देने की चल रही है तैयारी | New India Times

पीयूष मिश्रा/अश्वनी मिश्रा, सिवनी (मप्र), NIT:

NIT Exclusive: 2 करोड़ 75 लाख रुपये की योजना का बंटाधार करने वाले विभाग को 1 करोड़ 25 लाख रुपये और देने की चल रही है तैयारी | New India Times

“एमपी अजब है सबसे गजब है”, सरकार बदल गई लेकिन विभागों में जमे बैठे अधिकारियों के भ्रष्टाचार के कारनामे थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। दरअसल पूरा मामला सिवनी जिला के छपारा नगर का है जहां 2 करोड़ 75 लाख रुपए की इंटकवेल योजना का बंटाधार करने वाले अधिकारियों और ठेकेदार के भ्रष्टाचार की जांच कराने की बजाये अब फिर से इसी पीएचई विभाग को 1 करोड़ 25 लाख रुपये देने की तैयारी की जा रही है।

उल्लेखनीय है कि 9 वर्ष पूर्व छपारा नगर के लिए 2 करोड़ 75 लाख रुपए की इंटकवेल योजना स्वीकृत हुई थी लेकिन आज भी यह योजना आधे अधूरे हाल में पड़ी हुई है, जबकि इस योजना में स्वीकृत हुई 2 करोड़ 75 लाख की भारी भरकम राशि का पीएचई विभाग के अधिकारियों और ठेकेदार ने ऐसा बंटाधार किया जिससे कि छपारा नगर वासियों के लिए यह योजना सिर्फ सफेद हाथी बन कर रह गई है।

कल बुधवार को छपारा जनपद पंचायत में नगर की जल समस्या को लेकर बैठक में पीएचई के ए.के. जैन ने बताया कि 1 करोड़ 25 लाख का प्रपोजल पुनः इस योजना को सुचारू रूप से शुरू करने के लिए भेजा गया है। सवाल इस बात का है कि 2 करोड़ 75 लाख की भारी-भरकम राशि में भ्रष्टाचार करने वाले पीएचई विभाग का पेट नहीं भरा जो अब फिर से इसी योजना को सुचारू रूप से चालू करने के लिए 1 करोड़ 25 लाख रुपए का प्रपोजल तैयार कर शासन की ओर स्वीकृत होने के लिए भेज दिया है।

सूख गया है इंटकवेल

NIT Exclusive: 2 करोड़ 75 लाख रुपये की योजना का बंटाधार करने वाले विभाग को 1 करोड़ 25 लाख रुपये और देने की चल रही है तैयारी | New India Times

पिछले वर्ष भी गर्मियों के शुरुआत में ही वैनगंगा नदी का पानी इंटकवेल से करीब 20 फुट दूर जा चुका था और तब भी छपारा नगर वासियों को इस योजना से एक बूंद पानी नसीब नहीं हो पाया था और वर्तमान में भी हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। पिछले दिसंबर माह से इस इंटकवेल योजना से एक बूंद पानी भी छपारा नगर वासियों को नहीं मिल रहा है और अब तो इंटकवेल पूरी तरह सूख गया है। यही नहीं जिस जगह से पानी इंटकवेल में जाता था उस जगह से भी नदी का पानी कई फीट दूर जा चुका है। अब हालात तो यह है कि 10 -12 दिनों से छपारा नगर की जनता पानी पानी को तरस रही है और नल जल योजना नगर में पूरी तरह बंद पड़ी हुई है।

आखिर क्यों नहीं कराना चाहते जांच

छपारा नगर की लगभग 20 हजार की आबादी के लिए स्वीकृत हुई इस इंटकवेल योजना में भारी भ्रष्टाचार की जांच क्यों नहीं कराई जा रही है? ज्ञात हो कि NIT ने इस पूरे मामले को लेकर कई बार प्रमुखता से भी खबर प्रकाशित कर जिला प्रशासन का ध्यान इस योजना में हुए भारी भ्रष्टाचार की ओर आकर्षित कराया था। आखिर छपारा नगर की लगभग 20 हजार आबादी के लिए स्वीकृत हुई 2 करोड़ 75 लाख रुपए की इस इंटकवेल योजना का बंटाधार करने वाले पीएचई विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से मिलीभगत करने वाले ठेकेदार के उक्त योजना के निर्माण कार्यों की जांच क्यों और कौन नहीं कराना चाह रहा है? यहां यह बताना भी जरूरी है कि छपारा नगर में कांग्रेस और भाजपा के किसी भी नेता और जनप्रतिनिधि ने इस इंटकवेल योजना में हुए भारी भ्रष्टाचार की जांच की मांग नहीं की है।

By nit

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