विधायक व पूर्व मंत्री राजेन्द्र पारीक के सीकर लोकसभा उम्मीदवार चयन मंथन बैठकों से दूर रहने से उठ रहे हैं सवाल | New India Times

अशफाक कायमखानी, सीकर/जयपुर (राजस्थान), NIT:

विधायक व पूर्व मंत्री राजेन्द्र पारीक के सीकर लोकसभा उम्मीदवार चयन मंथन बैठकों से दूर रहने से उठ रहे हैं सवाल | New India Timesराजस्थान में पिछली अशोक गहलोत सरकार में नम्बर टू मंत्री रहे सीकर विधायक राजेन्द्र पारिक ने सीकर लोकसभा उम्मीदवार चयन को लेकर अब तक त्रिस्तरीय हो चुकी मंथन बैठकों से अपने आप को दूर रखने का कारण या मजबूरी तो वो स्वयं बेहतर जानते हैं लेकिन अब तक सीकर, जयपुर व दिल्ली में उम्मीदवार चयन को लेकर होने वाली रायशुमारी व मंथन बैठकों से उनके दूर रहने की चर्चा राजनीतिक हलकों मे काफी हद तक रुक रुक कर हो रही है।
दिसंबर 2018 में विधानसभा चुनाव सम्पन्न होने व अशोक गहलोत के नेतृत्व में राजस्थान सरकार गठित होने के बाद कांग्रेस पार्टी ने अपने स्तर पर लोकसभा उम्मीदवार चयन को लेकर अब तक त्रिस्तरीय मंथन बैठके कर चुकी है। उन तीनों मंथन बैठकों से सीकर विधायक राजेन्द्र पारीक ने अपने आपको दूर रखकर अपने लम्बे राजनीतिक अनुभव को अच्छे व जीताऊ उम्मीदवार के चयन के लिये पार्टी हित में अगर शेयर करते तो कांग्रेस पार्टी को बड़ा फायदा होता।
राजस्थान में कांग्रेस पार्टी ने राजस्थान के अन्य लोकसभा क्षेत्रों की तरह सीकर लोकसभा क्षेत्र के लिये भी उपयुक्त व जीताऊ उम्मीदवार चयन के लिये फीडबैक लेने के लिये पहले प्रभारी मंत्री व प्रभारी राष्ट्रीय सचिव को सीकर भेजकर प्रमुख नेताओं व आम कार्यकर्ताओं से विचार जाने उसके बाद जयपुर में मुख्यमंत्री निवास पर प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलेट, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रभारी राष्ट्रीय महासचिव व सचिव सहित अनेक अन्य दिग्गज नेताओं की उपस्थिति में जिले के प्रमुख नेता व जिला कमेटी के पदाधिकारी व विधायकों के साथ बैठक करके उनसे लोकसभा उम्मीदवार चयन को लेकर विचार विमर्श किया। जिन दोनो बैठको से भी विधायक राजेन्द्र पारीक ने अपने आपको दूर रखा था। उसके बाद 26-फरवरी को दिल्ली मे राष्ट्रीय महासचिव, सचिव व प्रदेशाध्यक्ष सहित अन्य हाईकमान द्वारा निर्देशित नेताओं ने पंजाब भवन मे सीकर लोकसभा क्षेत्र के कांग्रैस विधायकगण, विधानसभा उम्मीदवार रहे सहित जिलाध्यक्ष से सामुहिक व अलग गहन मंथन व उम्मीदवार चयन को लेकर गहराई के साथ विचार विमर्श किया। जिस बैठक से भी विधायक पारीक ने पूरी दूरी बनाकर रखी। जबकि उक्त बैठक मे पारीक का इंतज़ार भी हुवा बताते।
कुल मिलाकर यह है कि कांग्रेस सरकार बनने के बाद पिछले दो महिने में सीकर लोकसभा उम्मीदवार के चयन को लेकर सीकर, जयपुर व दिल्ली में होने वाली अलग अलग मंथन बैठकों के समय विधायक राजेन्द्र पारीक की विवशता व वयस्था रही होगी। लेकिन राजनीतिक हलकों में उक्त मामले की चर्चा खूब होती सूनाई दे रही है।

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One thought on “विधायक व पूर्व मंत्री राजेन्द्र पारीक के सीकर लोकसभा उम्मीदवार चयन मंथन बैठकों से दूर रहने से उठ रहे हैं सवाल”
  1. सीकर की सियासत को सरकार मे भागीदारी न होना बङा चिन्तन योग्य विषय है। 1952 के बाद पहली बार 2013 मे तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपनी सरकार मे सीकर के प्रतिनिधि राजेंद्र पारीक को शामिल कर मिसाल बनाते हुये अंचल को एक नई पहल कर पार्टी को संदेश दिया था। परिणाम यह रहा कि राजेन्द्र पारीक ने पूरी निष्ठा के साथ रिकार्ड तोङ बेहतरीन कार्य कर अमिट छाप छोङी। गहलोत के बाद पारीक ने अधिकतम राजस्व के साथ विकास को नये आयाम दिये। यहां बात पारीक को वर्ष 2018 मे बनी कांग्रेस सरकार मे मंत्री नही बनाया जाना महत्वपूर्ण नही है। अति महत्वपूर्ण यह है कि सर्वश्रेष्ठ परिणाम देने वाले व्यक्ति को उपेक्षित करना है। इस बार 2018 के चुनाव मे आठ विधान सभा क्षेत्र मे सात +1 सीट देकर भाजपा का सूपङा साफ कर कांग्रेस को मजबूत करने वाला सीकर जिला रहा है। ऐसे मे कांग्रेस सरकार मंत्रीमंडल गठन मे सीकर जिला वरीयता क्रम मे आता जो उपेक्षित छोङा गया। अंचल के आम अवाम इसको बहुत गंभीरता से ले रहा है। समय रहते तत्काल कांग्रेस आलाकमान को चिन्तन करके विचार करना चाहिए । पारीक को मंत्रीमंडल मे शामिल नही करने की स्थिति मे जनता जनार्दन के मध्य अनेक सवाल खङे कर दिये है।

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