राफेल और राजनीति | New India Times

अरशद आब्दी, ब्यूरो चीफ झांसी (यूपी), NIT:

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लेखक: सैय्यद शहंशाह हैदर आब्दी

राफेल पर उच्चतम न्यायालय के निर्णय की कुछ ख़ास बातें जो हम समझ सके:

1. प्रोसेस – सरकार ने जिस प्रक्रिया का पालन किया वो उचित है, हम उससे संतुष्ट हैं। 126 की जगह 36 जेट लेने पर हम कुछ नहीं कह सकते हैं।

2. दाम – मूल्य निर्धारण हमारा काम नहीं है।

3. आफसेट पार्टनर – ये विक्रेता (वेंडर) पर निर्भर है ना की सरकार के ऊपर, इसमें इंवाल्व होना हमारा काम नहीं है।

4. व्यक्तियों की धारणा पर हम हस्तक्षेप नहीं कर सकते हैं, इस मामले में एक्ज़ामिनेशन सेक्शन 32 के तहत अदालत द्वारा तय क्षेत्राधिकार के बिंदु पर हुयी है।

यहां हम सब याचिकाओं को ख़ारिज करते हैं।

हे गोदी मीडिया के टेलीविज़न वीरो और अंधविश्वासी चम्चो!

माननीय उच्चतम न्यायालय ने ये नहीं कहा की सब दुरुस्त है उन्होंने कहा कि ये हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। इसका मतलब सीबीआई और जेपीसी जांच कर सकतीं हैं। तुम लोग ख़ुश और भाषा की मर्यादा भूलकर ऐसे हमलावर हुऐ जैसे कि किसी सामूहिक हत्या या बलात्कार का आरोपी दोषमुक्त होकर ख़ुश होता है।

क्या उच्चतम न्यायलय में कांग्रेस ने राफेल मामले को उठाया?

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इस फैसले से कांग्रेस के आरोपों को नकारा नहीं जा सकता और न ही कांग्रेस इस फैसले को स्वीकार करने के लिए बाध्य है।

अगर भाजपा यह मानती हैं की राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पर झूठे आरोप लगाये हैं तो भाजपा मानहानि का मुक़द्दमा राहुल गांधी के विरुद्ध क्यों नहीं दायर करती?

जैसा की गृहमंत्री और वित्त मंत्री कह रह रहे हैं कि राहुल गांधी के आरोपों से देश की सुरक्षा ख़तरे में पड़ी है, सेना का अपमान हुआ है आदि आदि, तो इस सबके लिए भारतीय दंड विधान में 124 के तहत आपराधिक प्रकरण क्यों नहीं दर्ज कराते हैं?

राहुल गांधी तो अभी भी अपने कथन को सार्वजनिक रूप से दोहरा रहे हैं। इस फैसले में भी यह स्पष्ट कहा गया हैं कि विमान की क़ीमत के बारे में न्यायालय कोई निर्णय नहीं दे सकता है।

कांग्रेस अभी भी अपनी बात पर क़ायम हैं कि राफेल डील में 30 हज़ार करोड़ का घोटाला हुआ है, जब भी इसकी जांच होगी घोटाला सिद्ध हो जाएगा।

राहुल गांधी शुरू से ही सांसदों की समिति से जांच कराने की मांग कर रहे हैं। सांसदों की जांच समिति गठित करने से सरकार क्यों भाग रही है? संसदीय जांच समिति में तो सभी दलों के सदस्य होंगे और भाजपा के संसद सदस्यों की संख्या सबसे अधिक होगी।

शर्म आनी चाहिए तड़ीपार और तथाकथित राष्ट्रवादी संस्कारी पार्टी को बेहूदी भाषा के इस्तेमाल पर और राजनीतिक बहस के निम्न स्तर पर ले जाने पर।

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राफेल डील में सबसे अहम मुद्दा राफेल विमान की क़ीमत का है जो 500 करोड़ पूर्व सरकार द्वारा निर्धारित की गयी थी वह 1600 करोड़ में क्योँ खरीदा गया?

उच्चतम न्यायलय ने कहा कि इसकी जांच करना हमारा काम नहीं है यह काम सिर्फ संसदीय समिति ही कर सकती है, संसदीय जांच समिति गठित होनी चाहिए, आर्थिक घोटाला हुआ या नहीं हुआ? इस प्रश्न के हल हो जाने पर ही श्री राहुल गांधी के आरोपों की सच या झूठ का पता चलेगा।

तुम्हारे झूठ, अहंकार और नफरत के कारोबार से ही देश की शांति, न्यायप्रिय और धर्मनिरपेक्ष जनता ने तुम्हें सबक़ सिखाना शुरु कर दिया है। देश में अपने इस कारोबार से बाज़ आओ।

सैय्यद शहनशाह हैदर आब्दी–समाजवादी चिंतक

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