वी.के.त्रिवेदी, ब्यूरो चीफ लखीमपुर खीरी (यूपी), NIT:

उत्तर प्रदेश के जनपद लखीमपुर खीरी में भले ही यातायात माह मनाया जा रहा हो लेकिन जनपद भर में चल रहे ओवरलोड वाहन ट्रेक्टर में लगी डबल ट्रालियां हादसे का कारण बनती जा रही हैं। आये दिन सड़क हादसे हो रहे हैं लोग काल के गाल में आसमायिक मौत में समाते जा रहे हैं, किन्तु जनपद की सुस्त चेकिंग व्यवस्था और विभागीय अधिकारियों की लापरवाही लोगों के लिए मुसीबत बनती जा रही है। जनपद में जैसे ही चीनी मिलें चलती हैं मानों ओवरलोड वाहनों की बाढ़ सड़कों पर आ जाती है। गन्ना भरे ट्रक और ट्रालियां वह भी डबल जुड़ी होती हैं। गन्ना भरी इन ट्रालियों पर न तो रेडियम लगा होता है और न ही नियम के अन्तर्गत चलायी जाती हैं जिससे रात को घने कोहरे में लोग इनसे टकरा कर हादसे का शिकार बन जाते हैं। गन्ना भरी डबल ट्रालियां सड़कों पर आसानी से देखी जा सकती हैं, यही ओवरलोड वाहनों से बड़ी बड़ी दुर्घटनाएं भी होती हैं। घने कोहरे में इन्हीं वाहनो की चपेट में लोग आ जाते हैं और हादसे का शिकार बनते हैं। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने निजाम बदलते ही ओवरलोडिंग के खिलाफ अपने सख्त मंसूबे जाहिर करते हुए अधिकारियों को सख्त कार्यवाही के लिए निर्देश दिए थे जिसका असर समूचे प्रदेश में देखने को भी मिला था परन्तु हरगांव की अवध शुगर मिल, गोला की बजाज मिल के गन्ना ढोने वाले ट्रक और ट्रालियां अपनी क्षमता से बहुत अधिक गन्ना भरकर साक्षात कालरूप में फर्राटे भरना शुरू कर दिया है। प्रत्येक सत्र में खूब सड़क दुर्घटनाएं होती रहती हैं जिससे लोग काल कलवित भी हो जाते हैं, कुछ दिन हाय तौबा मचने के बाद फिर वही पुराना ढर्रा चल निकलता है। इस बार नई सरकार के सख्त तेवर लोगों के लिए आशा की किरण की तरह चमके थे परन्तु सम्बन्धित विभाग की लापरवाही के चलते ओवरलोडिंग खूब हो रही है।
गोपनीय सूत्रों ने बताया कि प्रत्येक ट्रक से हर महीने लखीमपुर के एआरटीओ तथा सीतापुर के एआरटीओ और स्थानीय पुलिस को रूपये देने पड़ते हैं और यह कटौती ट्रक भाड़े में काट ली जाती है। अधिकारी यह तो सब कुछ देख कर भी अनदेखा कर रहे हैं या सचमुच इन्हें दिखाई ही नही दे रहा है। आखिर यह खेल कब तक चलेगा इसका तो बाद में पता चलेगा कि ओवरलोडिंग बन्द होगी या फिर लोग बड़ी दुर्घटना का इन्तजार करेंगे।
