इम्तियाज चिश्ती/ अविनाश द्विवेदी, दमोह (मप्र), NIT;
दमोह में संविदा कर्मचारियों की हड़ताल दिनों दिन जोर पकड़ती जा रही है। संविदा नेताओं की मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से चर्चा के बाद कोई बड़ी घोषणा होने की उम्मीद की जा रही थी लेकिन मुख्यमंत्री से बात का कोई नतीजा नही निकला। आखिरकार इस दौरान संविदा आंदोलनकारियों से जुड़ी तीन अलग-अलग तस्वीर सामने आई है। जिनको देखकर यह कहा जा सकता है की संविदा कर्मियों की शासन से वार्ता के साथ साथ आंदोलन भी जोर पकड़े हुए है।
भोपाल में मुख्यमंत्री और पंचायत मंत्री के साथ हुई बैठक बे नतीजा साबित हुई। संविदा संयुक्त मोर्चा के बैनर तले हड़ताल प्रदर्शन के बीच पंचायत मंत्री गोपाल भार्गव की मध्यस्ता में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ संविदा संयुक्त मोर्चा के प्रतिनिधियों की चर्चा वार्ता संपन्न हुई। इस दौरान मुख्यमंत्री द्वारा संविदा कर्मियों की मांगों पर सहानुभूति जताते हुए अप्रैल के प्रथम सप्ताह में मप्र के समस्त संविदा कर्मचारियों की महापंचायत का आयोजन कर समाधान की बात कही है। मुख्यमंत्री के साथ हुई इस वार्ता का क्या नतीजा निकलेगा यह तो वक़्त ही बताएग, बहरहाल बीते कई दिनों से धरने पर बैठे संविदा कर्मियों का गुस्सा सरकार की नीतियों पर फूटा और फिर क्या सभी संविदाकर्मियों ने निकाल दी दी संविदा नीति की अर्थी, वो भी पारंपरिक उल्टे बाजे बजाकर। संविदानीति की अर्थी शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए जिले के डीएम कार्यालय के सामने से निकले और भ्रमण कर धरना स्थल पर पुतले की शक्ल में चिता जलाई गई।
दमोह में लगातार संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने 37वें दिन और संविदा संयुक्त मोर्चा के 13वें दिन भी प्रदर्शन जारी रखते हुए है अपनी मांगों को लेकर शासन प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए तरह तरह के जतन कर लिए लेकिन कल सभी संविदा कर्मियों के सब्र का बांध टूट गया और ये कदम उठा लिया। उल्टे बाजों की धुन के साथ सस्पेंडेड आदेशों की पुतले की चिता जलाते हुए सरकार से नियमितीकरण की मांग को लेकर संविदा संयुक्त मोर्चा द्वारा नारेबाजी की गई।
