अविनाश द्विवेदी/पवन सोनी, भिंड (मप्र), NIT;

भिंड के मुख्यालय से तकरीबन 5 कि.मी दूरी पर ग्राम पुर बसा हुआ है। इस गांव में लोगों की संख्या 7000 के लगभग है और इस गांव की वोटिंग संख्या 3000 के आस पास है लेकिन इस गांव का विकास आज तक नही हो पाया है। गांव के निवासी का कहना है कि इस गांव के सरपंच वीरेंद्र सिंह नरवरिया ने इस गांव में कोई कार्य नहीं करवाया है। इतना ही नही गांव के रोजगार सहायक सचिव अबदेश भदौरिया भी पूरे गाँव मे अपनी मन मानी करता हुआ घूमता नजर आ रहा।
गांव के प्रमुख्य मार्ग पुर से दूसरे गांव अमलेडा की ओर जाता है वह रोड तो अब बड़े बड़े गड्ढों में तब्दील हो गया है।
इतना ही नही गांव के रोजगार सहायक सचिव अबदेश भदौरिया तो पूरे गाँव को अपना घर समझ रहे है या यूं कह सकते है मनमानी कर रहे है।गाँव मे एक मत का मंदिर बना हुआ था जिससे गाँव के काफी लोग पुजनीय स्थान मानते है उस मंदिर के अगल बगल में गड्ढे करवा दिये है जब इस बारे में सचिव से बात की तो उनका कहना है कि यह मेरी स्वयम की जमीन है में कुछ भी करू मन्दिर के ठीक बगल में स्वस्थ केंद्र भी बना हुआ है। अब आगे देखते है मुख्यालय से दूर 5 की.मि दूर इस गांव के लोगों की समस्या कब खत्म होगी।

Midia ko v ab yad aa raha he sab bekar ki bate
Sab 500 rupay me bikao h
स्वच्छ भारत के तहत (पुरस्कार)
प्रोस उत्साह राशि आई वह भी खा गए साले
Khuch nahi hone wala job karne wale ka job kard to bana h paise v nikal gaye lekin job kard dhari ko pata hi nahi ye chal raha he pur me jo v ata he …sektri. ..sarph ghapla karne ki shoch rakhta …..midia ko ab yad aa raha ye to kafhi time se chal raha ……prop v h……..
भिण्ड जिले की ग्राम पंचायत गहेली का भी यही हाल है सन 1990 में झिलमिल नदी में बाढ़ आ जाने से गांव की विद्युत व्यबस्था तहस नहस हो गई थी जो आज तक नही सुधरी है अभी तक गांव में बिजली नही आई है एवम नल जल योजना में बनी पानी की टंकी बोर एवम सप्लाई लाइने बिछी होने के बाबजूद पानी सप्लाई करने की अधिकारियों को फुरसत ही नही है ।
भिण्ड जिले की ग्राम पंचायत गहेली का भी यही हाल है सन 1990 में झिलमिल नदी में बाढ़ आ जाने से गांव की विद्युत व्यबस्था तहस नहस हो गई थी जो आज तक नही सुधरी है अभी तक गांव में बिजली नही आई है एवम नल जल योजना में बनी पानी की टंकी बोर एवम सप्लाई लाइने बिछी होने के बाबजूद पानी सप्लाई करने की अधिकारियों को फुरसत ही नही है ।