रास्ता न होने से लाखों की लागत से बना शासकीय शौचालय बंद, अतिक्रमण पर प्रशासन मौन | New India Times

मोहम्मद इसहाक मदनी, ब्यूरो चीफ, मैहर (मप्र), NIT:

New India Times

जिस तरह शासकीय कर्मचारी अपने निजी भवनों एवं निजी शौचालयों के निर्माण व संचालन में विशेष रुचि लेकर कार्य कराते हैं, वैसी ही रुचि शासकीय शौचालयों एवं अन्य सरकारी भवनों के रखरखाव में नहीं दिखाई दे रही है। इसका जीवंत उदाहरण मैहर जिले के अमरपाटन विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत मुकुंदपुर में देखा जा सकता है।

ज्ञात हो कि शासकीय राशि से लाखों रुपये की लागत से लगभग पाँच वर्ष पूर्व निर्मित शासकीय शौचालय भवन, रास्ता अतिक्रमण के कारण निर्माण के बाद से आज तक चालू नहीं हो पाया है। शौचालय तक पहुँचने वाला आम रास्ता अतिक्रमणकारियों द्वारा बंद कर दिया गया है, लेकिन अब तक न तो पंचायत स्तर पर और न ही राजस्व अथवा अन्य संबंधित विभागों द्वारा इसे अतिक्रमण मुक्त कराया जा सका है।

इस संबंध में न तो सरपंच, न पंचायत सचिव, न ही पंचायत या राजस्व विभाग के किसी अधिकारी अथवा कर्मचारी ने ठोस कार्रवाई की है। सभी अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।
हालांकि, आम नागरिकों की शिकायत पर तत्कालीन प्रभारी तहसीलदार आर.डी. साकेत द्वारा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचकर अस्थायी रूप से रास्ता खुलवाया गया था, लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद अतिक्रमणकारियों ने पुनः आम रास्ते को अवरुद्ध कर दिया।

इसके बाद मामले की शिकायत नायब तहसीलदार ताला से भी की गई, किंतु समाचार लिखे जाने तक रास्ता अतिक्रमण मुक्त नहीं कराया जा सका। इससे अतिक्रमणकारियों के हौसले और बुलंद होते जा रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि यह मामला मध्य प्रदेश शासन की शासकीय भूमि आराजी नंबर 16, रकबा 86 डिसमिल, जो कि अत्यंत मूल्यवान भूमि है, से जुड़ा हुआ है। इसकी शिकायत नायब तहसीलदार कार्यालय में दर्ज कराई गई, परंतु लंबा समय बीत जाने के बावजूद फाइल ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है। स्थिति यह है कि उक्त भूमि पर एक ही अतिक्रमणकारी का कब्जा है, जो शासन-प्रशासन पर भारी पड़ता नजर आ रहा है।

रास्ता अवरुद्ध होने के कारण न केवल शौचालय भवन अनुपयोगी पड़ा है, बल्कि नाली निर्माण कार्य भी प्रभावित हो रहा है। इससे मोहल्ले के गरीब तबके के कच्चे मकानों में रहने वाले लोग बरसात के मौसम में गंभीर परेशानियों का सामना करते हैं। भारी बारिश के दौरान अचानक पानी घरों में भर जाता है, जिससे कच्चे मकानों के गिरने का खतरा बना रहता है और लोगों की रातों की नींद हराम हो जाती है।

लाखों रुपये की लागत से बना शासकीय शौचालय भवन उपयोग में न आने के कारण उसकी स्थिति दिन-प्रतिदिन बद से बदतर होती जा रही है, जो शासन की योजनाओं और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

By nit