भिंड में कैडबरी कंपनी पर स्वास्थ्य विभाग का छापा, रसायनयुक्त पानी के सैंपल लिए गए; विधायक देसाई रहे मौजूद | New India Times

आशिफ शाह, ब्यूरो चीफ भिंड (मप्र), NIT:

भिंड जिले के मालनपुर औद्योगिक क्षेत्र में स्थित कैडबरी लिमिटेड कंपनी में मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छापा मारकर कंपनी से निकलने वाले दूषित एवं रसायनयुक्त पानी के सैंपल लिए। इस कार्रवाई के दौरान क्षेत्रीय विधायक केशव देसाई, ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी गोहद डॉ. वासुदेव सिकारिया, कंपनी के हेल्थ एंड सेफ्टी मैनेजर शशांक, तथा बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

इस अवसर पर विधायक केशव देसाई ने आरोप लगाते हुए कहा कि कंपनी से निकलने वाला दूषित पानी क्षेत्र के लगभग एक दर्जन गांवों को प्रभावित कर रहा है। ग्रामीणों में त्वचा रोग, खुजली और अन्य बीमारियाँ तेजी से फैल रही हैं।

उन्होंने कहा कि कैडबरी अब क्षेत्र के लिए विकास का प्रतीक नहीं, बल्कि पर्यावरणीय विनाश का कारण बनती जा रही है।
विधायक देसाई ने यह भी आरोप लगाया कि मालनपुर क्षेत्र में संचालित कई औद्योगिक इकाइयाँ खुलेआम पर्यावरण कानूनों का उल्लंघन करते हुए रासायनिक और औद्योगिक अपशिष्ट को नदियों, नालों और खुले इलाकों में छोड़ रही हैं। इसका दुष्परिणाम अब भयावह रूप ले चुका है और हजारों स्थानीय लोग इसकी कीमत चुका रहे हैं।

उन्होंने हाल ही में इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रशासन शायद किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा है। हर बार हादसे के बाद वही मुआवजा, राहत और औपचारिक कार्रवाई का नाटक दोहराया जाता है।

नदियाँ नहीं रहीं जीवनदायिनी, बन गईं मौत की धार

स्थानीय लोगों के अनुसार, कारखाने से निकलने वाला बिना शोधन का रसायनयुक्त पानी नालियों के माध्यम से सीधे नदियों में छोड़ा जा रहा है। इससे नदी में मछलियाँ और अन्य जलीय जीव मर रहे हैं, पानी से दुर्गंध उठ रही है और नदी किनारे की उपजाऊ ज़मीन तेज़ी से बंजर होती जा रही है।
यह स्थिति केवल प्रदूषण नहीं, बल्कि प्रकृति के विरुद्ध खुला अपराध है।

अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र केवल काग़ज़ों में

शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि प्रत्येक औद्योगिक इकाई में अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र (ETP) अनिवार्य होना चाहिए। लेकिन मालनपुर की कई फैक्ट्रियों में यह संयंत्र या तो मौजूद नहीं है, या केवल काग़ज़ों में दर्शाया गया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिना शोधन संयंत्र इन फैक्ट्रियों को संचालन की अनुमति किसके संरक्षण में दी गई?

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भूमिका संदिग्ध

इतनी गंभीर स्थिति के बावजूद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। इस मामले में बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डी.वी.एस. जाटव से मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ।

क्या निरीक्षण केवल फाइलों में हो रहा है?

स्थानीय लोगों में यह चर्चा आम हो चुकी है कि
क्या जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं,
या फिर औद्योगिक इकाइयों और अधिकारियों के बीच कोई सांठगांठ है?
जनता का कहना है कि कानून आम लोगों के लिए है, कारखानों के लिए नहीं।

कंपनियों की मुनाफ़ाखोरी की कीमत चुका रही जनता

कारखाना संचालक मुनाफ़े की अंधी दौड़ में पर्यावरण, पशुधन और जनस्वास्थ्य की बलि दे रहे हैं। यदि यही हाल रहा, तो आने वाले वर्षों में मालनपुर क्षेत्र को जल संकट, भूमि की उर्वरता समाप्त होने और गंभीर स्वास्थ्य आपदा का सामना करना पड़ेगा।

इनका कहना है

“कैडबरी कंपनी से निकलने वाले पानी की शिकायत प्राप्त हुई थी। आज सैंपल लिए गए हैं और जांच के लिए भेज दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।”
— डॉ. वासुदेव सिकारिया, ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी, गोहद

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