आजादी के बाद भी सड़क को तरसा छिंदखेड़ा गांव, कीचड़ भरे रास्ते से स्कूल जाते हैं बच्चे; मरीजों को चारपाई पर ले जाने को मजबूर ग्रामीण | New India Times

मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:

आजादी के बाद भी सड़क को तरसा छिंदखेड़ा गांव, कीचड़ भरे रास्ते से स्कूल जाते हैं बच्चे; मरीजों को चारपाई पर ले जाने को मजबूर ग्रामीण | New India Times

जुन्नारदेव विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत तामिया विकासखंड की ग्राम पंचायत हराकपुरा के ग्राम छिंदखेड़ा के दर्जनों ग्रामीणों ने गांव की बदहाल सड़क की समस्या मीडिया के सामने रखी। ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के बाद से अब तक गांव की सड़क का निर्माण नहीं हुआ है। बारिश के दिनों में सड़क पर कीचड़ और जलभराव होने से ग्रामीणों का आवागमन मुश्किल हो जाता है।

छिंदखेड़ा गांव के ग्रामीणों के मुताबिक बारिश होते ही गांव की सड़क पर जगह-जगह पानी और कीचड़ भर जाता है। इसका सबसे अधिक असर स्कूली बच्चों पर पड़ता है। बच्चे इसी खराब रास्ते से स्कूल जाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने बताया कि कई बार कीचड़ में फिसलने के कारण बच्चे गिरकर घायल भी हो जाते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से सड़क निर्माण की मांग ग्राम पंचायत हराकपुरा के सरपंच और सचिव से की जा रही है, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है।

एंबुलेंस नहीं पहुंचती, चारपाई पर मरीजों को ले जाते हैं ग्रामीण

छिंदखेड़ा के ग्रामीणों ने बताया कि सड़क खराब होने का असर आपात स्थिति में भी देखने को मिलता है। गांव में किसी के बीमार पड़ने पर एंबुलेंस खराब रास्ते के कारण अंदर तक नहीं पहुंच पाती। ऐसे में मरीज को चारपाई पर रखकर कच्चे और कीचड़ भरे रास्ते से मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। इसके बाद एंबुलेंस के माध्यम से मरीज को अस्पताल पहुंचाया जाता है।

अब देखना यह है कि शासन-प्रशासन छिंदखेड़ा ग्राम के ग्रामीणों की वर्षों पुरानी सड़क निर्माण की मांग कब तक पूरी करता है।

By nit

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