सरकारी कुंभ"निद्रा" के विरोध में आंदोलन करेगी शिवसेना : बदहाली के कारण जनता परेशान | New India Times

नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

सरकारी कुंभ"निद्रा" के विरोध में आंदोलन करेगी शिवसेना : बदहाली के कारण जनता परेशान | New India Times

35 हजार करोड़ रुपया फूंककर आयोजित किए जाने वाले नासिक सिंहस्थ अर्ध कुंभ की घटिया तैयारियों को लेकर जनता का विरोध बढ़ता जा रहा है। नासिक में पत्रवार्ता के माध्यम से जन संवाद कर चुके राज ठाकरे के बाद शिवसेना नेता संजय राउत ने कुंभ प्रबंधक गिरीश महाजन को आंदोलन की चेतावनी दी है। मानसून की बारिश से पूरे नासिक की सड़के उखड़ चुकी है उसमे कुंभ के लिए ठेके ग्रहण करने वाली कथित गुजराती कंपनियों ने निर्माण के नाम पर सारा शहर खोद डाला।

सरकारी कुंभ"निद्रा" के विरोध में आंदोलन करेगी शिवसेना : बदहाली के कारण जनता परेशान | New India Times

नासिक के अलग अलग इलाकों में जर्जर सड़कों के कारण हुए हादसों में दर्जनों मौते हो गई है। नागपुर IIT समेत केंद्र सरकार की नामचीन संस्थाओं को कुंभ के आयोजन की आधिकारिक ज़िम्मेदारी सौंपी जाने के बाद राज्य सरकार ने अपने प्रतिनिधि के रूप में गिरीश महाजन को कुंभ मंत्री बनाकर नासिक में तैनात किया है। मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस नासिक के अभिभावक मंत्री हैं आपदा प्रबंधन विभाग सीधे उनके नियंत्रण में आता है। जनता मांग कर रही है कि किसी स्थानीय नेता को नासिक का अभिभावक मंत्री बनाया जाए।

नासिक ठाणे पालघर इलाके में लेफ्ट विचारधारा का खास प्रभाव है जिसके चलते ग़लत का प्रतिरोध करना जनता के स्वभाव में है। विपक्ष ने कुंभ के बजट को कमीशन की बंदरबांट करार दे कर देवेन्द्र फड़नवीस सरकार की ईमानदारी को चुनौती दी है। इन आरोपों के जवाब में सरकार द्वारा बरती जा रही अनदेखी और लापरवाही के कारण गोदावरी का तट अब संघर्ष का मैदान बनता जा रहा है।

दिलीप खोड़पे ने की जांच की मांग :
बोगस शिक्षक भर्ती (शालार्थ आई डी) घोटाले को लेकर महाराष्ट्र में अब जनजागृति होती नज़र आ रही है। जामनेर एनसीपी प्रमुख दिलीप खोड़पे ने इस घोटाले में पकड़े गए आरोपी संजय गरुड़ द्वारा खरीदी गई करोड़ों रूपये की प्रॉपर्टी और संस्था के विकास की जांच कराने की मांग की है। जंतर मंतर पर हुए छात्र आंदोलन के दबाव में देवेन्द्र फड़नवीस सरकार को बोगस शिक्षक भर्ती घोटाले में गिरफ्तारिया करनी पड़ी है।

सरकार से अनुदान लेने वाली शिक्षा संस्थाओं ने सरकार की मान्यता के बगैर अफ़सरों से हाथ मिलाकर आरक्षित सीटों पर बेरोजगारों से लाखों रुपए लेकर शिक्षक भर्ती कर सरकारी तिजोरी से वेतन की रकम भी गबन की है।

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