अब्दुल वाहिद काकर, ब्यूरो चीफ, धुले (महाराष्ट्र), NIT:

डिजिटल युग में भाषाओं के बदलते स्वरूप के बीच उर्दू को नई पीढ़ी से जोड़ने और तकनीक के माध्यम से उसके प्रचार-प्रसार को लेकर महाराष्ट्र राज्य उर्दू साहित्य अकादमी ने महत्वपूर्ण पहल की है। मंगलवार को मालेगांव के उर्दू घर में “सोशल मीडिया के जरिए उर्दू का प्रचार और संभावनाएं” विषय पर आयोजित राज्यस्तरीय सेमिनार में वक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि यदि उर्दू ने डिजिटल प्लेटफॉर्म को नहीं अपनाया, तो उसकी समृद्ध विरासत आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना कठिन हो जाएगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सैयद हसीन अख्तर ने की, जबकि हाशमी सैयद शोएब प्रमुख अतिथि रहे। सैयद हसीन अख्तर ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार उर्दू भाषा के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है तथा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि अकादमी द्वारा धुलिया, बीड, पुणे समेत विभिन्न जिलों में विद्यार्थियों, पत्रकारों और साहित्यकारों के लिए सोशल मीडिया, डिजिटल पत्रकारिता और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
पहले सत्र की अध्यक्षता करते हुए मौलाना उमरैन महफूज रहमानी ने कहा कि उर्दू किसी एक वर्ग की नहीं, बल्कि साझा संस्कृति और मोहब्बत की भाषा है, जो आम जनजीवन और सूफी परंपरा से विकसित हुई है। उन्होंने उर्दू साहित्य को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए विभिन्न भाषाओं की श्रेष्ठ कृतियों का उर्दू में अनुवाद बढ़ाने पर जोर दिया।
वक्ता इम्तियाज खलील ने कहा कि आज सूचना की दुनिया तेजी से बदल रही है और सोशल मीडिया ने खबरों के स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया है। उन्होंने कहा कि अब लंबी टीवी सामग्री की जगह 3 से 5 मिनट की रील्स ने ले ली है और जेड जनरेशन इसी माध्यम से जानकारी हासिल कर रही है। ऐसे में उर्दू समाज को समय रहते डिजिटल प्लेटफॉर्म अपनाना होगा, अन्यथा नई पीढ़ी से दूरी बढ़ सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि उर्दू विश्व की प्रमुख भाषाओं में शामिल है और इसके साहित्य को डिजिटल माध्यम से संरक्षित करना समय की मांग है।
सेमिनार में धुलिया से वरिष्ठ पत्रकार वाहिद काकर, तव्वाब अंसारी, जमील शाह, खय्याम अंसारी, शहाबुद्दीन शेख तथा जलगांव से सोहैल शेख और शकील शेख सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

