बीकेपी शिक्षा महाविद्यालय में समान नागरिक संहिता पर जन-परामर्श, विद्यार्थियों ने रखे सुझाव और संवैधानिक दृष्टिकोण पर हुई सार्थक चर्चा | New India Times

राकेश यादव, देवरी/सागर (मप्र), NIT:

बीकेपी शिक्षा महाविद्यालय में समान नागरिक संहिता पर जन-परामर्श, विद्यार्थियों ने रखे सुझाव और संवैधानिक दृष्टिकोण पर हुई सार्थक चर्चा | New India Times

कार्यालय कलेक्टर, मध्यप्रदेश शासन के निर्देशानुसार पं. बृजकिशोर पटेरिया शिक्षा महाविद्यालय, देवरी में “समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code): आवश्यकता, संभावनाएँ एवं चुनौतियाँ” विषय पर जन-परामर्श एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षकगण एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए विषय के संवैधानिक, सामाजिक एवं विधिक पक्षों पर गंभीर विचार-विमर्श किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के संचालक डॉ. अवनीश मिश्रा ने कहा कि भारतीय संविधान केवल एक विधिक दस्तावेज नहीं, बल्कि देश की लोकतांत्रिक चेतना, समानता और न्याय की भावना का आधार है। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता जैसे विषयों पर स्वस्थ संवाद और जनभागीदारी लोकतंत्र को और अधिक मजबूत बनाती है। युवाओं को ऐसे विषयों को पूर्वाग्रहों से मुक्त होकर संवैधानिक दृष्टिकोण से समझना चाहिए तथा राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में अपनी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कार्यक्रम प्रभारी एवं राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष शिवम शर्मा ने समान नागरिक संहिता की अवधारणा, भारतीय संविधान के अनुच्छेद-44 तथा वर्तमान जन-परामर्श प्रक्रिया पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति संवाद, सहभागिता और जागरूक नागरिकों में निहित होती है। किसी भी महत्वपूर्ण नीति पर समाज के विभिन्न वर्गों के विचार जानना लोकतांत्रिक परंपराओं को सुदृढ़ करता है तथा नागरिकों को शासन प्रक्रिया से जोड़ता है।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने उत्साह एवं गंभीरता के साथ सहभागिता करते हुए समान नागरिक संहिता के विभिन्न आयामों से जुड़े प्रश्न पूछे और अपने विचार व्यक्त किए। विद्यार्थियों ने कानून के संभावित सामाजिक प्रभाव, महिलाओं के अधिकारों, सांस्कृतिक विविधताओं के संरक्षण तथा राष्ट्रीय एकता से जुड़े विषयों पर अपनी जिज्ञासाएँ रखीं। इस दौरान डॉ. अवनीश मिश्रा, शिवम शर्मा एवं अन्य शिक्षकों ने विद्यार्थियों के प्रश्नों का तथ्यपरक एवं सरल भाषा में समाधान प्रस्तुत किया। साथ ही विषय से संबंधित विभिन्न भ्रांतियों एवं गलतफहमियों का निराकरण करते हुए समान नागरिक संहिता की अवधारणा, उद्देश्य तथा वर्तमान जन-परामर्श प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी दी। संवादात्मक वातावरण में संपन्न हुई इस परिचर्चा ने विद्यार्थियों में विषय के प्रति संतुलित दृष्टिकोण, बेहतर समझ एवं जागरूकता विकसित की।

राजनीति विज्ञान की छात्राओं सांत्वना पांडे एवं खुशी पटेल ने उपस्थित सभी विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को एक स्वर में संविधान की प्रस्तावना का वाचन कराया। “हम भारत के लोग…” के उद्घोष से पूरा सभागार गूंज उठा, जिससे संवैधानिक मूल्यों, राष्ट्रीय एकता एवं लोकतांत्रिक चेतना का प्रेरणादायी वातावरण निर्मित हुआ।

कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों को मध्यप्रदेश शासन की जन-परामर्श प्रक्रिया में सक्रिय सहभागिता करते हुए अपने सुझाव ucc.mp.gov.in पोर्टल पर दर्ज कराने के लिए प्रेरित किया गया। विद्यार्थियों की उल्लेखनीय उपस्थिति एवं विषय के प्रति उनकी गंभीरता ने कार्यक्रम को सफल और सार्थक बनाया।

कार्यक्रम का संचालन सुश्री बुशरा खान एवं रितिका ठाकुर ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन श्रीमती प्रतिभा पाण्डेय ने व्यक्त किया। इस अवसर पर संतोष तिवारी, हेमलता दुबे, ऋतु मिश्रा, माधव नेमा, सुनील दुबे, शनि तिवारी, कौशल्या कुर्मी, रिया गुप्ता सहित महाविद्यालय के समस्त शिक्षकगण, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।

By nit

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.