अहमद रज़ा, चुनार/मिर्ज़ापुर (यूपी), NIT:

ऐतिहासिक नगरी चुनार में 7 मुहर्रम के अवसर पर हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) की याद में पारंपरिक जुलूस पूरे अकीदत, श्रद्धा और गमगीन माहौल में निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में अज़ादारों ने शिरकत की तथा नौहाख्वानी और मातम के माध्यम से कर्बला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश किया।
जुलूस का मार्ग और मुख्य आकर्षण
यह ऐतिहासिक जुलूस गंगेश्वर नाथ इमामबाड़ा से शुरू होकर अपने पारंपरिक मार्गों से होते हुए बाजार रस्तोगी और चौक पहुँचा। इसके बाद जुलूस कर्बला गया और देर रात पुनः गंगेश्वर नाथ इमामबाड़ा पहुँचकर शांतिपूर्वक संपन्न हुआ।
अलम और जुलजनाह का दीदार
जुलूस में हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) की निशानी अलम मुबारक और जुलजनाह (सजा हुआ घोड़ा) भी शामिल रहे। इनके दीदार के लिए रास्तों पर अकीदतमंदों की भारी भीड़ उमड़ी। लोगों ने जुलजनाह पर फूल पेश किए और अपनी मन्नतें मांगीं।
मातम और नौहाख्वानी
जुलूस के दौरान पूरा माहौल गमगीन रहा। विभिन्न अंजुमनों ने दर्दभरी नौहाख्वानी की, जिसे सुनकर हर आँख नम हो गई। “या हुसैन”, “या अली” और “या अब्बास” की सदाओं के बीच अज़ादारों ने मातम कर हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके वफादार भाई हज़रत अब्बास (अ.स.) की शहादत को खिराज-ए-अकीदत पेश किया।
सुरक्षा व्यवस्था
जुलूस को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस पूरी तरह मुस्तैद रही। पूरे मार्ग पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। जुलूस कमेटी और स्थानीय नागरिकों ने भी व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन का पूरा सहयोग किया।
चुनार का 7 मुहर्रम का यह पारंपरिक जुलूस आपसी भाईचारे, अमन और अकीदत की मिसाल पेश करते हुए शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।

