आसिम खान, ब्यूरो चीफ, छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:

विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर अंचल के समाजसेवी रिंकू रितेश चौरसिया ने सेवा और मानवता की मिसाल पेश करते हुए अब तक 2140 यूनिट नि:शुल्क रक्तदान कराने का उल्लेखनीय कार्य किया है। उनकी पहल से न केवल जिला अस्पताल के ब्लड बैंक को मजबूती मिली है, बल्कि सैकड़ों जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध हो सका है।
इस दौरान चौरसिया ने समाज की एक कड़वी सच्चाई भी उजागर की। उन्होंने भावुक होकर कहा कि कई बार सक्षम लोग भी अपने ही परिजनों के लिए रक्तदान करने से पीछे हट जाते हैं, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को भारी मानसिक व शारीरिक पीड़ा झेलनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि “जब अपने ही साथ छोड़ देते हैं, तब बेबस मरीजों की हालत देखकर दिल रो उठता है।” इसी स्थिति को बदलने के लिए उन्होंने यह मुहिम शुरू की।
रिंकू रितेश चौरसिया द्वारा संचालित “जागते रहो” और “खून का रिश्ता” समूह आज जिले में जीवनदायिनी भूमिका निभा रहे हैं। इन समूहों से जुड़े 2,000 से अधिक सक्रिय रक्तदाता एक कॉल पर अस्पताल पहुंचकर नि:शुल्क रक्तदान करते हैं। खास बात यह है कि सभी रक्तदाता अपने निजी खर्च पर जरूरतमंदों की मदद के लिए तत्पर रहते हैं।
युवाओं को इस अभियान से जोड़ने के लिए चौरसिया लगातार स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता अभियान चला रहे हैं। उनके प्रयासों से बड़ी संख्या में युवा रक्तदान के लिए आगे आए हैं और भय व संकोच को त्यागकर इस सामाजिक अभियान का हिस्सा बन रहे हैं।
इस पूरी व्यवस्था को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया गया है, जिसमें रक्तदाताओं की पूरी जानकारी सुरक्षित रखी जाती है। साथ ही हर रक्तदान की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक की जाती है।
गंभीर मरीजों, विशेषकर सिकल सेल और थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के लिए विशेष ‘आई-कार्ड’ की व्यवस्था भी इस पहल की बड़ी उपलब्धि है। तत्कालीन कलेक्टर के सहयोग से बनाए गए इन कार्डों के जरिए 1,000 से अधिक मरीजों को समय पर रक्त मिल पा रहा है, जो उनके लिए सुरक्षा कवच साबित हो रहा है।
चौरसिया ने अपने निजी खर्च पर जिले में 18 से अधिक वृहद रक्तदान शिविरों का आयोजन भी किया है। इन शिविरों के माध्यम से हजारों यूनिट रक्त एकत्र कर जिला अस्पताल के ब्लड बैंक को उपलब्ध कराया गया।
इस सफलता का श्रेय उन्होंने अपने सहयोगियों और सैकड़ों समर्पित रक्तदाताओं को दिया, जो दिन-रात मरीजों की सेवा में जुटे हैं।
अंत में उन्होंने अंचलवासियों से अपील की कि रक्तदान को अपनी सामाजिक जिम्मेदारी समझें, ताकि किसी भी व्यक्ति की जान केवल रक्त की कमी के कारण न जाए।

