रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी/पंकज बड़ोला, झाबुआ (मप्र), NIT:

झाबुआ में आयोजित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर जनपरामर्श बैठक में विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों ने महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए। जनसंवाद के माध्यम से आयोजित इस बैठक में जनप्रतिनिधि, राजनीतिक दलों के सदस्य, सामाजिक संगठन, अधिवक्ता एवं पत्रकारों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
बैठक में विवाह और तलाक के लिए सभी नागरिकों हेतु समान कानून बनाए जाने पर जोर दिया गया। साथ ही महिला और पुरुष की विवाह आयु समान निर्धारित करने तथा महिलाओं के उत्तराधिकार अधिकारों में समानता सुनिश्चित करने की मांग प्रमुख रूप से सामने आई।

जनजातीय समाज की विशिष्ट संस्कृति, परंपराओं और रीति-रिवाजों को ध्यान में रखते हुए प्रतिभागियों ने सुझाव दिया कि उन्हें यूसीसी के दायरे से अलग रखा जाए या उनके लिए पृथक कानूनी प्रावधान तैयार किए जाएं। साथ ही यह भी कहा गया कि जनजातीय वर्ग के हित और उनकी विकास में भागीदारी किसी भी स्थिति में प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
बैठक में लिव-इन रिलेशनशिप से जन्मे बच्चों और सिंगल मदर के बच्चों के उत्तराधिकार अधिकारों को स्पष्ट और न्यायसंगत बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। इसके अलावा आम नागरिकों को कानून की जानकारी देने के लिए सहायता केंद्र स्थापित करने और व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने का सुझाव दिया गया।
प्रतिभागियों ने यूसीसी का प्रारूप पूर्ण पारदर्शिता के साथ तैयार करने और विभिन्न पहलुओं पर गहन चर्चा के लिए स्थानीय स्तर पर समितियों के गठन की भी बात कही। साथ ही जिन राज्यों में यूसीसी लागू है, वहां के सामाजिक और प्रशासनिक प्रभावों का अध्ययन कर उनके अनुभवों को नीति निर्माण में शामिल करने पर जोर दिया गया।

