ईद-उल-जुहा पर देखी गई भाईचारे की मिसाल, गले मिलकर दी गई मुबारकबाद, अमन-चैन की मांगी गई दुआएं | New India Times

रहीम शेरानी हिंदुस्तानी/पंकज बड़ोला (मप्र), NIT:

ईद-उल-जुहा पर देखी गई भाईचारे की मिसाल, गले मिलकर दी गई मुबारकबाद, अमन-चैन की मांगी गई दुआएं | New India Times

ईद-उल-जुहा का त्योहार पूरे जिले में हर्षोल्लास और धार्मिक आस्था के साथ मनाया गया। सुबह से ही बच्चे, बुजुर्ग और युवा ईदगाह पहुंचकर नमाज़ अदा करने लगे। ईदगाह पर मौलाना सलमान साहब ने नमाज़ अदा कराई और खुत्बा सुनाते हुए देश में अमन-चैन, खुशहाली और आपसी भाईचारे की दुआ मांगी। नमाज़ के बाद लोगों ने एक-दूसरे से गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी।
खुत्बे में मौलाना सलमान साहब ने आपसी इत्तेहाद और इत्तफाक पर जोर देते हुए कहा कि इंसान को जायज और नाजायज, हलाल और हराम का फर्क समझकर जीवन जीना चाहिए। उन्होंने हजरत अबू बकर सिद्दीक का उदाहरण देते हुए बताया कि इंसान को हराम से बचना चाहिए और पाक जीवन अपनाना चाहिए।

ईद-उल-जुहा पर देखी गई भाईचारे की मिसाल, गले मिलकर दी गई मुबारकबाद, अमन-चैन की मांगी गई दुआएं | New India Times

ईद से पहले मरकज मस्जिद में मौलाना अम्मार साहब ने हजरत इब्राहिम और हजरत इस्माईल अलैहिस्सलाम की कुर्बानी का जिक्र करते हुए बताया कि कुर्बानी केवल जानवर की नहीं, बल्कि अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को निभाना भी सच्ची कुर्बानी है। उन्होंने कहा कि देश के प्रति वफादारी, पड़ोसियों और रिश्तेदारों के हक अदा करना भी कुर्बानी का ही रूप है।
हाफिज मोहसिन पटेल ने अपने बयान में कहा कि इंसान को अल्लाह से किए गए वादों को निभाना चाहिए और उसकी इबादत में सच्चाई लानी चाहिए। वहीं हाफिज रिजवान साहब ने बताया कि रोजेदार, न्यायप्रिय शासक और मजलूम की दुआ कभी रद्द नहीं होती।
नमाज़ के बाद बड़ी संख्या में लोग कब्रिस्तान पहुंचे और अपने मरहूम रिश्तेदारों के लिए दुआएं खैर की। इस दौरान शहर में हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल भी देखने को मिली, जहां सभी समुदायों के लोगों ने एक-दूसरे को ईद की शुभकामनाएं दीं।
ईद के मौके पर पूरे क्षेत्र में खुशी, भाईचारा और सौहार्द का माहौल बना रहा।

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