अब्दुल वाहिद काकर, ब्यूरो चीफ, धुले (महाराष्ट्र), NIT:

मालेगांव के पवार वाड़ी इलाके में मस्जिद-ए-इमामुल मुत्तकीन का भव्य उद्घाटन रूहानी और पुरनूर माहौल में सम्पन्न हुआ। इस मौके पर पीर-ए-तरीक़त हज़रत मौलाना शाह कमरुज्मा साहब ने अपने मुबारक हाथों से मस्जिद का उद्घाटन किया। कार्यक्रम का आयोजन हज़रत मौलाना इफ्तेखार सालिक कासमी की निगरानी में बज्म-ए-फ़ैज़ान-ए-कमर के तत्वावधान में किया गया।
उद्घाटन समारोह में शहर सहित बाहरी इलाकों से बड़ी संख्या में उलेमा-ए-किराम, हाफिज़, कारी, समाजसेवी और अकीदतमंद शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत तिलावत-ए-कुरआन और नात-ए-पाक से हुई।
इस दौरान मौलाना मसूद अख्तर कासमी ने मस्जिद की तामीर और उसमें सहयोग करने की अहमियत पर रोशनी डालते हुए कहा कि मस्जिदें समाज में दीन, अख़लाक़ और इंसानियत की बुनियाद को मजबूत करती हैं।
मौलाना कमरुज्मा साहब के बड़े पुत्र मौलाना महफूज़ साहब ने अपने बयान में अच्छे अख़लाक़, रूहानियत और खिदमत-ए-ख़ल्क़ पर जोर देते हुए कहा कि इंसान की असली पहचान उसके चरित्र और अल्लाह से उसके रिश्ते में होती है।
मुख्य संबोधन में मौलाना कमरुज्मा साहब ने कहा कि मस्जिदें केवल इबादत की जगह नहीं, बल्कि इंसानी अख़लाक़ और रूहानी तरबियत की तालीमगाह हैं। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में इंसान अपनी रूहानियत से दूर होता जा रहा है, जबकि सूफिया-ए-किराम ने हमेशा अल्लाह की याद, दिल की सफाई और तकब्बुर से बचने की तालीम दी है।
उन्होंने नौजवानों से अपील की कि वे कुरआन की तिलावत करें, मस्जिदों से जुड़ें और अपनी रूहानी जिंदगी को मजबूत बनाएं। इस दौरान उन्होंने कहा कि कामयाबी सिर्फ बातों से नहीं, बल्कि अमल, अल्लाह के ज़िक्र और खिदमत-ए-दीन से हासिल होती है।
कार्यक्रम के आखिर में हज़रत मौलाना कमरुज्जामा साहब की दुआ पर मज्लिस का इख्तेताम हुआ।
इस अवसर पर मौलाना इफ्तेखार सालिक कासमी ने सभी मेहमानों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। उपस्थित लोगों ने मस्जिद को इलाके के लिए एक अहम दीनि और रूहानी केंद्र बताया।

