मक़सूद अली, ब्यूरो चीफ, यवतमाल (महाराष्ट्र), NIT:

महाराष्ट्र के यवतमाल शहर में महावितरण द्वारा चलाए जा रहे बिजली चोरी जांच अभियान को लेकर विवाद गहरा गया है। शहर के कई अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में की जा रही सघन कार्रवाई से स्थानीय नागरिकों में नाराजगी और आक्रोश देखने को मिल रहा है।
पिछले दो-तीन दिनों से पांढरकवडा रोड स्थित कोहिनूर सोसायटी, बिलाल कॉलोनी, शर्मा लेआउट सहित पुराने नागपुर रोड क्षेत्र के पोबारू लेआउट और चमेडिया लेआउट में महावितरण की 10 से 15 टीमें लगातार घर-घर जाकर बिजली मीटरों की जांच कर रही हैं। इस दौरान भारी पुलिस बल की तैनाती भी की गई है, जिससे क्षेत्र में भय का माहौल बन गया है।
बिना सूचना कार्रवाई के आरोप
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि महावितरण की टीमें बिना पूर्व सूचना घरों में प्रवेश कर मीटर जांच कर रही हैं। कई मामलों में महिलाओं के अकेले होने के बावजूद टीमों के जबरन घर में घुसने और अभद्र व्यवहार करने की शिकायतें सामने आई हैं। इसके अलावा, मीटर में मामूली तकनीकी खामी मिलने पर तुरंत पुराने मीटर हटाकर डिजिटल मीटर लगाए जा रहे हैं, लेकिन उपभोक्ताओं को न तो पर्याप्त जानकारी दी जा रही है और न ही कोई लिखित नोटिस दिया जा रहा है।
अचानक बिजली कटौती से बढ़ी परेशानी
नागरिकों का कहना है कि अभियान के दौरान कई घरों की बिजली बिना सूचना काट दी जा रही है। आरोप है कि मोबाइल फोन के माध्यम से आदेश देकर कुछ ही मिनटों में सप्लाई बंद कर दी जाती है। भीषण गर्मी और 40 डिग्री से अधिक तापमान के बीच अचानक बिजली कटौती से बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
“सिर्फ कुछ इलाकों में ही सख्ती क्यों?”
स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि यदि यह अभियान पूरे शहर के लिए है, तो कार्रवाई मुख्य रूप से अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में ही क्यों की जा रही है। अन्य इलाकों में इस स्तर की जांच नहीं होने से लोगों में भेदभाव की आशंका गहराती जा रही है।
महावितरण के रवैये पर सवाल
नागरिकों ने कहा कि बिजली चोरी रोकना आवश्यक है, लेकिन आम लोगों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार करना उचित नहीं है। बिना सूचना जांच, तत्काल मीटर बदलना और बिजली काटने की कार्रवाई से लोगों में रोष बढ़ रहा है। कुछ क्षेत्रों में कर्मचारियों और नागरिकों के बीच बहस और तनाव की स्थिति भी बनी।
निष्पक्ष जांच की मांग तेज़
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि यह कार्रवाई नियमानुसार है, तो इसे पूरे शहर में समान रूप से लागू किया जाए अन्यथा एक विशेष समुदाय को निशाना बनाने के आरोप गंभीर रूप ले सकते हैं।
कुछ नागरिकों ने इस मामले की शिकायत जिला प्रशासन और पालकमंत्री से करने की तैयारी भी शुरू कर दी है।
महावितरण की चुप्पी
विवाद के बीच महावितरण की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि यह अभियान बिजली चोरी रोकने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है, लेकिन आरोपों के बाद इसकी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
निष्कर्ष:
शहर में बढ़ते असंतोष को देखते हुए प्रशासन से पारदर्शिता और स्पष्टता की मांग तेज़ हो गई है। नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते स्थिति स्पष्ट नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में इस अभियान के खिलाफ बड़ा आंदोलन खड़ा हो सकता है।
