अबरार अहमद खान/मुकीज़ खान, भोपाल (मप्र), NIT:

भोपाल के निर्भया महिला आश्रय गृह में एक ऐसी शादी संपन्न हुई, जिसने समाज के सामने इंसानियत, भाईचारे और अपनापन की अनूठी मिसाल पेश की। यहां रहने वाली पूजा राजपाली ने मुरली काछी के साथ सात फेरे लिए, लेकिन यह विवाह सिर्फ दो लोगों का मिलन नहीं, बल्कि भावनाओं और संघर्षों की एक प्रेरणादायक कहानी बन गया।

जानकारी के अनुसार, पूजा जब आश्रय गृह पहुंची थीं, तब वह अकेली नहीं थीं, बल्कि उनकी गोद में एक नन्ही बच्ची भी थी। पिछले 18 महीनों से आश्रय गृह ने मां-बेटी को सहारा दिया और आज उसी छत के नीचे दोनों को एक नया परिवार मिल गया। संयोग से 15 अप्रैल को बच्ची का पहला जन्मदिन भी था, जिससे यह दिन और भी खास बन गया।
इस शादी की सबसे खास बात यह रही कि यहां खून के रिश्तों की जगह दिल से जुड़े रिश्तों ने अहम भूमिका निभाई। पूजा की इच्छा पर शेर अफ़ज़ल खान और समर खान ने माता-पिता की भूमिका निभाते हुए कन्यादान किया। विवाह की सभी रस्में हल्दी, मेहंदी और विदाई पूरे सम्मान और परंपरा के साथ संपन्न हुईं।

विदाई के दौरान भावनात्मक माहौल देखने को मिला, जब मुब्सिरा खान ने बुआ बनकर दुल्हन को चांदी की बिछिया पहनाई। साथ ही नवदंपति को जरूरी गृहस्थी का सामान देकर उनके नए जीवन की शुरुआत के लिए विदा किया गया।
गौरतलब है कि निर्भया महिला आश्रय गृह अब तक 8 ऐसी शादियां करवा चुका है, जहां बेसहारा महिलाओं को नया जीवन मिला है। वहीं शेर अफ़ज़ल खान और समर खान द्वारा 8 हिंदू बेटियों का कन्यादान कर सामाजिक सौहार्द और भाईचारे की मजबूत मिसाल पेश की गई है।
यह आयोजन साबित करता है कि रिश्ते सिर्फ खून से नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, अपनापन और प्यार से बनते हैं। भोपाल से सामने आई यह कहानी समाज को नई सोच और सकारात्मक दिशा देने का काम कर रही है।

