रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी/पंकज बड़ोला, झाबुआ (मप्र), NIT:

स्थानीय जैन तीर्थ श्री ऋषभदेव बावन जिनालय में प्रभु श्री महावीर स्वामी भगवान का जन्म कल्याणक महोत्सव पुण्य सम्राट श्रीमद विजय जयंतसेन सूरीश्वर जी महाराज साहेब के शिष्यरत्न मुनिराज श्री चारित्ररत्न विजय जी महाराज साहेब एवं मुनिराज श्री अजीतसेन विजय जी महाराज साहेब सहित श्रमण-श्रमणी वृंद की पावन निश्रा में मंगलवार को सकल जैन श्वेतांबर श्रीसंघ झाबुआ द्वारा भव्य रूप से मनाया गया। इस अवसर पर भगवान महावीर स्वामी की भव्य रथयात्रा भी निकाली गई।

कार्यक्रम में अतिथि के रूप में पूर्व सांसद कांतिलाल भूरिया, गुमानसिंह डामोर, विधायक विक्रांत भूरिया एवं नगर पालिका परिषद के बिट्टू सिंगार उपस्थित रहे।

श्रीसंघ के रिंकु रुनवाल ने बताया कि जन्म कल्याणक के अवसर पर प्रातः से ही जिनालय में पूजन-अर्चना के लिए श्रावक-श्राविकाओं की भीड़ रही।
कार्यक्रम के अंतर्गत बावन जिनालय में विराजित भगवान महावीर स्वामी का शक्रस्तव अभिषेक राजेंद्र रुनवाल परिवार द्वारा किया गया। केशर पूजन का लाभ निखिल भंडारी परिवार ने लिया। पूजन के पश्चात भगवान की रथयात्रा निकाली गई।
भव्य रथयात्रा निकाली गई
रथयात्रा प्रातः 9:30 बजे बावन जिनालय से प्रारंभ हुई। इसमें धर्मध्वज लेकर घोड़े पर बालक जीनांस भंडारी एवं हियांश सकलेचा सवार थे। इसके पश्चात 50 से अधिक नन्हे-मुन्ने बच्चे भगवान महावीर स्वामी एवं माता त्रिशला के स्वरूप में शामिल हुए।
मुनि भगवंतों के साथ श्रावक वर्ग एवं साध्वी भगवंत के साथ श्राविकाएं भी शामिल हुईं। रथ में भगवान को लेकर जय कटारिया बैठे थे, जबकि दिलीप संघवी सारथी के रूप में थे। भगवान के दोनों ओर हियांश रुनवाल एवं गाथा सकलेचा चंवर डुला रहे थे। रथ को युवा वर्ग द्वारा खींचा गया।
यात्रा के दौरान जगह-जगह भगवान के रथ के समक्ष अक्षत-श्रीफल से गहुली की गई। युवा वर्ग द्वारा “त्रिशलानंदन वीर की जय, बोलो महावीर की जय” एवं “जियो और जीने दो” जैसे नारे लगाए गए। रथयात्रा रुनवाल बाजार, मेन मार्केट, राजवाड़ा चौक, लक्ष्मीबाई मार्ग होते हुए पुनः बावन जिनालय पहुंची, जहां महाआरती मनोहरलाल छाजेड़ परिवार द्वारा की गई।
धर्मसभा का आयोजन
बावन जिनालय उपाश्रय में धर्मसभा का आयोजन हुआ। गुरु वंदन की क्रिया श्रावक रत्न धर्मचंद मेहता द्वारा कराई गई। श्रीसंघ अध्यक्ष संजय मेहता, प्रदीप रुनवाल, मितेश गादिया एवं वरिष्ठजनों ने भगवान महावीर स्वामी के चित्र पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलित किया।
अतिथियों ने अपने उद्बोधन में कहा कि भगवान महावीर स्वामी के अहिंसा और सत्य के सिद्धांत आज पूरे विश्व के लिए मार्गदर्शक हैं।
पूज्य मुनिराज श्री चारित्ररत्न विजय जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि भगवान महावीर के अनेकांतवाद एवं अपरिग्रह के सिद्धांत आज भी अत्यंत प्रासंगिक हैं। वर्तमान समय में एकांतवाद और अत्यधिक संग्रह की प्रवृत्ति के कारण विश्व में संघर्ष बढ़ रहे हैं। ऐसे में सत्य, अहिंसा, अचौर्य, ब्रह्मचर्य एवं अपरिग्रह के पंच सिद्धांतों को अपनाकर विश्व में शांति स्थापित की जा सकती है।
मुनि श्री ने कहा कि भगवान महावीर किसी एक संप्रदाय तक सीमित नहीं थे, बल्कि उन्होंने समस्त जीवों के कल्याण के लिए धर्म का मार्ग प्रशस्त किया।
मुनिराज श्री अजीतसेन विजय जी महाराज ने कल्पसूत्र के अंतर्गत भगवान महावीर स्वामी के जन्म का वाचन किया। वाचन के पश्चात अंकुर छाजेड़ द्वारा थाली-डंका बजाकर सूचना दी गई। संस्कार मेहता द्वारा केसरिया छापे लगाए गए। कमलाबेन मुथा परिवार द्वारा प्रभु का पालना झुलाया गया तथा 14 स्वप्नों की विधि संपन्न की गई।
कार्यक्रम का संचालन संजय मेहता ने किया एवं आभार रत्नदीप सकलेचा ने माना।
पूजन एवं सामायिक का आयोजन
महावीर स्वामी भगवान की पंचकल्याणक पूजन श्राविकाओं द्वारा संपन्न की गई। इसके पश्चात दोपहर 2 से 3 बजे तक सामूहिक सामायिक का आयोजन हुआ, जिसमें अशोक जी कटारिया द्वारा तैयार प्रश्नपत्र के माध्यम से धार्मिक गतिविधि आयोजित की गई।
जीवदया के कार्य
जन्म कल्याणक के अवसर पर जैन समाज एवं जैन सोशल ग्रुप द्वारा सद्गुरु गौशाला में भूसे से भरी एक गाड़ी भेंट की गई। साथ ही संजय काठी परिवार द्वारा पक्षियों के लिए पानी के पात्र (चकोर) वितरित किए गए।

