नरेंद्र कुमार, ब्यूरो चीफ, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

आठ वर्षों बाद आयोजित जामनेर नगर परिषद की जनरल मीटिंग बंद कमरे में संपन्न किए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। बैठक में कुल 25 विषयों को बिना औपचारिक मंजूरी के विचाराधीन मानते हुए मुख्याधिकारी (CO) के समक्ष रख दिया गया।
विपक्ष के नेता जावेद इकबाल अब्दुल रशीद मुल्लाजी ने प्रेस वार्ता कर आरोप लगाया कि विपक्ष की मांग के बावजूद प्रशासनिक कार्यकाल में तैयार एजेंडा उपलब्ध नहीं कराया गया। उन्होंने कहा कि प्रशासन ऑडिट रिपोर्ट देने से भी बच रहा है और पूरे क्षेत्र में एक निजी जमीन के आवंटन की कोशिश की जा रही है, जिसे उन्होंने गैर-कानूनी बताया।
जावेद ने यह भी आरोप लगाया कि सीसीटीवी पर अनावश्यक खर्च की योजना बनाई जा रही है, जबकि पुराने सिस्टम को ही पुनः चालू किया जा सकता है। उन्होंने प्रशासक काल के करीब 450 प्रस्तावों को संदेहास्पद बताते हुए कहा कि यदि मीडिया निष्पक्षता से काम करे तो भ्रष्टाचार रुक सकता है।
उन्होंने कहा, “हम जनता को दिखाएंगे कि नगर परिषद का कामकाज कैसे चलाया जा रहा है। यह तो सिर्फ ट्रेलर है, पूरी तस्वीर अभी सामने आना बाकी है।”
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि जामनेर नगर परिषद अब तक मुख्य रूप से घंटागाड़ी संचालन और कच्चे अतिक्रमण हटाने के कार्यों के लिए जानी जाती रही है। पूर्व कार्यकाल में राजू बोहरा के समय बुनियादी काम हुए थे, लेकिन क्षेत्र अपेक्षित औद्योगिक विकास नहीं कर सका।
पत्रकारों को बैठक से बाहर किया गया।
बंद कमरे में आयोजित इस बैठक से पत्रकारों को बाहर कर दिया गया, जिससे मीडिया जगत में नाराज़गी है। कुछ स्थानीय पत्रकारों ने इसे लोकतांत्रिक पारदर्शिता के खिलाफ बताया और घटना पर आपत्ति जताई।

