मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:
डुंगरिया ग्राम पंचायत एवं आसपास के क्षेत्रों में आवारा कुत्तों (स्वानों) का आतंक दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है, जिससे ग्रामीणों में भय और परेशानी का माहौल बना हुआ है।
ग्रामीणों के अनुसार कुत्तों के काटने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। बताया गया कि डुंगरिया निवासी मोहन नरै वर्षों से कुत्ते के काटे हुए लोगों का झाड़-फूंक के माध्यम से उपचार करते आ रहे हैं।
परंपरा के अनुसार बेसन की लोई से दिन में तीन बार झाड़-फूंक की जाती है, जिससे लोगों को राहत मिलती है। ग्रामीणों का कहना है कि अब तक हजारों लोगों का इस विधि से उपचार किया जा चुका है।
कुत्ते के काटे गए व्यक्तियों को प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल भी ले जाया जाता है, जहां उन्हें रेबीज (Rabies) का इंजेक्शन लगाया जाता है।
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि आवारा कुत्तों को पकड़कर जंगल या सुरक्षित स्थानों पर छोड़ा जाए, क्योंकि कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। सड़कों पर झुंड के रूप में घूमते कुत्तों के कारण दुर्घटनाएं भी हो रही हैं, वहीं गली-मोहल्लों में भी लोगों का बाहर निकलना मुश्किल हो गया है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई कर समस्या के समाधान की मांग की है, ताकि क्षेत्रवासियों को राहत मिल सके।

