केंद्रीय बजट आम जनता के लिए नहीं, सिर्फ़ दिखावे और खोखले वादों का दस्तावेज़: उमंग सिंघार | New India Times

जमशेद आलम, ब्यूरो चीफ, भोपाल (मप्र), NIT:

मध्यप्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष श्री उमंग सिंघार ने केंद्रीय बजट पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह बजट किसानों, युवाओं, मजदूरों और मध्यम वर्ग की अपेक्षाओं को पूरी तरह नजरअंदाज करता है। यह बजट जनकल्याण के बजाय केवल भाषणों, घोषणाओं और खोखले वादों तक सीमित रह गया है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी वर्ष 2014 से किसानों की आय दोगुनी करने की बात करते आ रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है।

मध्यप्रदेश का किसान आज न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को लेकर सबसे अधिक परेशान है। मक्का जैसी फसल किसानों को 800, 1000 या 1200 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बेचनी पड़ रही है, जिससे उत्पादन लागत तक नहीं निकल पा रही। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस बजट में किसानों की इस गंभीर समस्या का कोई ठोस समाधान प्रस्तुत किया गया है?

युवाओं के मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि केंद्र सरकार बार-बार स्टार्टअप और रोजगार की बातें करती है, लेकिन मध्यप्रदेश के युवाओं को इसका कोई वास्तविक लाभ नहीं मिला। स्टार्टअप के नाम पर केवल मंचों से भाषण दिए गए, जबकि जमीनी स्तर पर रोजगार और अवसर कहीं नजर नहीं आते।

मनरेगा को लेकर उन्होंने कहा कि 60:40 के अनुपात में बदलाव तो कर दिया गया, लेकिन प्रदेश और देश के हजारों मजदूर आज भी रोजगार की तलाश में पलायन करने को मजबूर हैं। इसके बावजूद इस बजट में उनके लिए कोई नया या ठोस प्रावधान नहीं किया गया।

जल जीवन मिशन पर सवाल उठाते हुए श्री सिंघार ने कहा कि घर-घर नल से जल पहुंचाने का नारा देने वाली भाजपा सरकार ने इस बजट में इस योजना के लिए कोई अतिरिक्त राशि का प्रावधान नहीं किया। जब पर्याप्त बजट ही नहीं होगा, तो हर घर तक स्वच्छ पेयजल कैसे पहुंचेगा?

उन्होंने कहा कि एक ओर बड़े उद्योगपतियों के हजारों करोड़ रुपये के कर्ज माफ किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नौकरीपेशा और मध्यम वर्ग को आयकर में कोई राहत नहीं दी गई। आम नागरिक को उम्मीद थी कि टैक्स का बोझ कम होगा, लेकिन सरकार ने उसकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

आयुष्मान भारत योजना पर टिप्पणी करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि 70 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को मुफ्त इलाज की घोषणा सराहनीय है, लेकिन 70 वर्ष से कम आयु के करोड़ों गरीब नागरिकों, उनके माता-पिता और परिवारों के लिए सरकार ने कोई ठोस व्यवस्था नहीं की।

अंत में श्री उमंग सिंघार ने कहा कि जनसेवा का अर्थ उद्योगपतियों की सेवा नहीं, बल्कि आम नागरिक की सेवा होना चाहिए। यह बजट किसानों, मजदूरों, युवाओं और मध्यम वर्ग की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता और इसमें कई गंभीर विसंगतियाँ स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं।

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