रमज़ान की इबादत में अहम भूमिका निभाने वाले हाफ़िज़-ए-क़ुरआन के सम्मान की उठी आवाज़, हाजी इमरान हारून ने रखी मांग | New India Times

अबरार अहमद खान/मुकीज़ खान, भोपाल (मप्र), NIT:

कोमी ख़िदमतगार भोपाल के हाजी मोहम्मद इमरान हारून ने रमज़ान के पवित्र महीने के आगमन से पूर्व इमाम व मोअज़िन हज़रात के मासिक वेतन में बढ़ोतरी की मांग एक बार फिर दोहराई है। उन्होंने मध्यप्रदेश वक़्फ़ बोर्ड एवं मसाजिद कमेटी के पदाधिकारियों से अपील करते हुए कहा कि बढ़ती महंगाई के दौर में वर्तमान वेतन से इमाम व मोअज़िन का गुज़ारा संभव नहीं है।

हाजी इमरान हारून ने कहा कि मसाजिद कमेटी के अधीन आने वाली मस्जिदों में कार्यरत इमाम व मोअज़िन 24 घंटे सेवाएं देते हैं, लेकिन उन्हें मात्र चार से पांच हज़ार रुपये मासिक वेतन मिलता है, जो आज के समय में अपर्याप्त है। उन्होंने मांग की कि इमाम व मोअज़िन के वेतन में बढ़ोतरी किया जाए ताकि वे सम्मानजनक जीवन यापन कर सकें। उन्होंने मसाजिद कमेटी से इस विषय पर गंभीरता से निर्णय लेने का आग्रह किया है।

इसके अलावा हाजी इमरान हारून ने निकाह ख़्वाह (हल्का क़ाज़ी) हज़रतों के नज़राने में भी बढ़ोतरी की भी मांग की है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में निकाह ख़्वाह को मिलने वाला नज़राना भी बहुत कम है, जिसे बढ़ाया जाना चाहिए ताकि उन्हें भी आवश्यक सहूलियत मिल सके।
रमज़ान के मद्देनज़र एक विशेष मांग रखते हुए हाजी इमरान हारून ने कहा कि पवित्र माह में तरावीह की विशेष नमाज़ अदा की जाती है, जिसे पढ़ाने के लिए विशेष हाफ़िज़-ए-क़ुरआन मस्जिदों में सेवाएं देते हैं। मसाजिद कमेटी के अधीन आने वाली मस्जिदों में भी यह व्यवस्था होती है, लेकिन इन हाफ़िज़ों को न तो कोई विशेष नज़राना दिया जाता है और न ही रमज़ान पैकेज।
उन्होंने मांग की है कि कि तरावीह पढ़ाने वाले हाफ़िज़ों को भी मसाजिद कमेटी की ओर से विशेष रमज़ान नज़राना और रमज़ान पैकेज प्रदान किया जाए।
हाजी इमरान हारून ने उम्मीद जताई कि रमज़ान से पूर्व इन सभी मांगों पर सकारात्मक और गंभीर निर्णय लिया जाएगा, जिससे धार्मिक सेवाओं में लगे लोगों को सम्मान और राहत मिल सके।

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