इटवा में स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे चल रहा खेल: पहले सील हो चुका ‘पब्लिक पैथोलॉजी’ फिर विवादों में | New India Times

अबरार अली, ब्यूरो चीफ, सिद्धार्थ नगर (यूपी), NIT:

स्थानीय कस्बा इटवा में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर मरीजों की जान से खिलवाड़ का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन की नाक के नीचे ‘पब्लिक पैथोलॉजी एण्ड अल्ट्रासाउंड सेंटर’ की संदिग्ध गतिविधियां एक बार फिर चर्चा में हैं। यह वही संस्थान है, जिस पर पूर्व में नियमों की अनदेखी के आरोपों में प्रशासन द्वारा कार्रवाई की जा चुकी है।

गौरतलब है कि कुछ समय पूर्व इस जांच लैब के विरुद्ध स्वास्थ्य विभाग ने कड़ी कानूनी कार्रवाई करते हुए मानकों के विपरीत संचालन और अनियमितताओं के चलते इसे कई महीनों के लिए सील कर दिया था। उस दौरान यह मामला कस्बे में चर्चा का विषय बना रहा।

लेकिन चंद महीनों बाद दोबारा खुले इस सेंटर के संचालन को लेकर फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सेंटर में रिपोर्ट तैयार करने और अल्ट्रासाउंड के लिए निर्धारित विशेषज्ञ डॉक्टर अक्सर मौजूद नहीं रहते। यहां से जारी होने वाली जांच रिपोर्टों की विश्वसनीयता पर भी लगातार सवाल उठते रहे हैं।

आरोप है कि पिछड़े क्षेत्र के भोले-भाले मरीजों को आधुनिक मशीनों का झांसा देकर उनसे मनमानी फीस वसूली जा रही है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जो लैब पहले सील हो चुकी थी, उसे दोबारा संचालन की अनुमति किन शर्तों पर दी गई। क्या दोबारा खुलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने उपकरणों और विशेषज्ञों की योग्यता की जांच की?

कस्बा इटवा में खुलेआम चल रही इन गतिविधियों ने विभागीय मिलीभगत की आशंका को भी जन्म दिया है। क्षेत्रवासियों ने मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन सिद्धार्थनगर से मांग की है कि इस लैब के पुराने रिकॉर्ड और वर्तमान स्थिति की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

यदि मानकों का उल्लंघन पाया जाता है, तो सेंटर को स्थायी रूप से बंद कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि गरीबों की सेहत से खिलवाड़ रोका जा सके।

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