मुख्यमंत्री योगी के दौरे से पहले अंबेडकर नगर में भ्रष्टाचार को लेकर एआरटीओ की फजीहत, परिवहन विभाग पर गंभीर आरोप | New India Times

गणेश मौर्या, ब्यूरो चीफ, अंबेडकर नगर (यूपी), NIT:

मुख्यमंत्री योगी के दौरे से पहले अंबेडकर नगर में भ्रष्टाचार को लेकर एआरटीओ की फजीहत, परिवहन विभाग पर गंभीर आरोप | New India Times

जिले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रस्तावित कार्यक्रम से पहले परिवहन विभाग एक बार फिर भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर सुर्खियों में है। परिवहन विभाग के अधिकारी एआरटीओ शैलेंद्र सिंह यादव की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं, लेकिन जिले के जिम्मेदार अधिकारी कथित रूप से आंख मूंदे बैठे हुए हैं।

मुख्यमंत्री योगी के दौरे से पहले अंबेडकर नगर में भ्रष्टाचार को लेकर एआरटीओ की फजीहत, परिवहन विभाग पर गंभीर आरोप | New India Times

एआरटीओ कार्यालय में बढ़ते भ्रष्टाचार और आम जनता से कथित रूप से की जा रही खुली रिश्वतखोरी के खिलाफ लगातार खबरें प्रकाशित हो रही हैं। इसके बावजूद न तो जिला प्रशासन और न ही शासन स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई होती नजर आ रही है। जनता ने जिलाधिकारी अंबेडकर नगर और उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह से तत्काल भ्रष्टाचार समाप्त कराने की मांग की है।

मुख्यमंत्री योगी के दौरे से पहले अंबेडकर नगर में भ्रष्टाचार को लेकर एआरटीओ की फजीहत, परिवहन विभाग पर गंभीर आरोप | New India Times

अकबरपुर स्थित परिवहन विभाग को लेकर आमजन का कहना है कि वहां भ्रष्टाचार का “अमृत महोत्सव” मनाया जा रहा है। आज़ादी के 78 वर्षों बाद भी यदि सरकारी परिवहन कार्यालयों में बिना दलालों के कोई काम न हो, तो यह न केवल शर्मनाक है बल्कि स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानी का अपमान भी है।

मुख्यमंत्री योगी के दौरे से पहले अंबेडकर नगर में भ्रष्टाचार को लेकर एआरटीओ की फजीहत, परिवहन विभाग पर गंभीर आरोप | New India Times

आरोप है कि ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन फिटनेस और आरसी जैसे जरूरी कार्यों के लिए लोगों से खुलेआम रिश्वत मांगी जाती है। साथ ही अधिकारियों और कर्मचारियों का व्यवहार भी आम जनता के प्रति असभ्य और उपेक्षापूर्ण बताया जा रहा है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि एआरटीओ सत्येंद्र सिंह यादव के संरक्षण में दलाल सक्रिय हैं, जिनमें सौरव, सूरज, राघवेंद्र, पप्पू, मनोज, सुशील यादव तथा कार्यालय गेट पर बैठने वाला राजेंद्र माली प्रमुख रूप से शामिल बताए जा रहे हैं।

इसके अलावा नियम-कानून को ताक पर रखते हुए, स्मार्ट चिट कंपनी का टेंडर समाप्त होने के बावजूद परिवहन विभाग के अधिकारियों के संरक्षण में पुरानी कंपनी से जुड़े लोग—प्रवीण मिश्रा, सुभाष वर्मा और प्रवेश श्रीवास्तव—अब भी विभागीय कार्यों में सक्रिय बताए जा रहे हैं। इसे लेकर लोगों में चर्चा है कि यह अधिकारियों की मजबूरी है या किसी तरह का अघोषित समझौता (एग्रीमेंट) किया गया है।

मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से पहले सामने आए इन आरोपों ने एक बार फिर जिले के परिवहन विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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