अबरार अहमद खान/मुकीज़ खान, भोपाल (मप्र), NIT:
मध्यप्रदेश पुलिस ने जनवरी 2026 में मानवीय संवेदनशीलता और जनसेवा की मिसाल पेश करते हुए महाराष्ट्र में फंसे 36 मजदूरों को सकुशल उनके घर पहुंचाया है। विदिशा और अशोकनगर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई से यह संभव हो सका, जिसने यह सिद्ध कर दिया कि पुलिस केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं, बल्कि संकट में फंसे श्रमिकों और कमजोर वर्गों के लिए भरोसे की ढाल भी है।
जानकारी के अनुसार, थाना दीपनाखेड़ा, जिला विदिशा को सूचना मिली कि ग्राम बरबटपुर के करीब 20 मजदूरों को रोजगार का झांसा देकर महाराष्ट्र ले जाया गया है, जहां उन्हें बंधक बनाकर जबरन काम कराया जा रहा है और वे घर लौटने में असमर्थ हैं। इसी तरह अशोकनगर जिले से भी स्थानीय जनप्रतिनिधियों के माध्यम से 16 मजदूरों के महाराष्ट्र में फंसे होने की सूचना प्राप्त हुई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों जिलों की पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की। जांच में मजदूरों के ग्राम गिरोली, थाना वाशी, जिला धराशिवा (महाराष्ट्र) में होने की पुष्टि हुई। इसके बाद विदिशा और अशोकनगर पुलिस की संयुक्त टीमों को सक्रिय किया गया। पुलिस टीम स्वयं महाराष्ट्र पहुंची, मजदूरों से संपर्क स्थापित किया और 36 महिला, पुरुष मजदूरों व बच्चों को सुरक्षित रूप से बस एवं रेल के माध्यम से उनके घर वापस लाया गया।
यह कार्रवाई स्पष्ट करती है कि मध्यप्रदेश पुलिस श्रमिकों, आदिवासी वर्ग और कमजोर तबकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। रोजगार के नाम पर हो रहे शोषण को रोकना, अंतरराज्यीय समन्वय स्थापित करना और पीड़ितों को सुरक्षित उनके परिवारों तक पहुंचाना—यह सब पुलिस की संवेदनशील सोच, सामाजिक दायित्व और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
कठिन समय में मध्यप्रदेश पुलिस हर नागरिक के साथ खड़ी है—यही इस सफल अभियान का सबसे बड़ा संदेश है।

