दान देकर स्मरण भी न रहे, वही सच्चा सर्वत्र दान : साध्वी श्री रत्नरेखा श्रीजी | New India Times

रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

झाबुआ में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए पूज्य साध्वी श्री रत्नरेखा श्रीजी महाराज साहेब ने कहा कि स्वाध्याय करने की कोई उम्र नहीं होती। जैसे-जैसे स्वाध्याय बढ़ता है, वैसे-वैसे आत्मिक भावना भी प्रबल होती जाती है। स्वाध्याय ही जप, तप और क्रिया का मूल आधार है।

उन्होंने कहा कि गर्व या प्रचार के साथ किया गया दान, दान की श्रेणी में नहीं आता। दान देकर पश्चाताप नहीं करना चाहिए, न ही उसका प्रदर्शन करना चाहिए। दान देने के बाद उस पर अपना अधिकार, नाम और स्मरण तक समाप्त हो जाना चाहिए। यहां तक कि मन में भी उसका स्मरण न रहे—वही सच्चा सर्वत्र दान कहलाता है।

यह उद्गार उन्होंने श्री बावन जिनालय उपाश्रय में आयोजित महावीर जैन मोगरा के सम्मान समारोह के अवसर पर व्यक्त किए।

इस अवसर पर पूज्य साध्वी श्री कल्पदर्शिता श्रीजी महाराज साहेब ने कहा कि प्रभु ने जिस मार्ग को प्रशस्त किया है, उस पर चलकर ही आत्मा का कल्याण संभव है। हमें परमात्मा की छवि को अपनी अंतरात्मा में उतारना चाहिए।

श्री संघ के रिंकु रूनवाल ने बताया कि श्री ऋषभदेव बावन जिनालय उपाश्रय में साध्वी श्री रत्नरेखा श्रीजी महाराज साहेब के सान्निध्य में श्री संघ के महावीर जैन के सेवानिवृत्त होने पर प्रवचन एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में श्री संघ अध्यक्ष संजय मेहता ने अपने उद्बोधन में महावीर जैन के सेवाकाल की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने धर्ममय आचरण के साथ पूरी ईमानदारी से अपने दायित्वों का निर्वहन किया। सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने सम्मान समारोह को पूर्णतः धर्ममय बना दिया।

श्री संघ के वरिष्ठ सदस्य अशोक कटारिया, डॉ. प्रदीप संघवी, संजय काठी, यशवंत भंडारी, कमलेश कोठारी एवं अरविंद जैन ने महावीर जैन के सेवाकाल, धर्मसेवा एवं सामाजिक कार्यों की प्रशंसा की।

इस अवसर पर उनके पुत्र गौरव जैन एवं भांजे संदीप भैया ने संस्मरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि महावीर जैन ने सदैव अपने दायित्वों का निर्वहन पूर्ण ईमानदारी एवं निष्ठा के साथ किया।

जैन श्वेतांबर श्री संघ, मालवा महासंघ, विघ्नहरा पार्श्वनाथ जैन ट्रस्ट, सकल व्यापारी संघ, आचार्य श्री तीर्थेंद्र सूरी समिति, श्री महावीर बाग ट्रस्ट, परिषद परिवार, शिक्षा विभाग सहित विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के पदाधिकारियों द्वारा महावीर जैन का शाल, श्रीफल एवं तिलक लगाकर सम्मान किया गया।

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