फैज़ान खान, गुरुग्राम/फरीदाबाद/चंडीगढ़ , NIT:
वर्ष 2018 में फरीदाबाद, गुरुग्राम और दिल्ली तक हड़कंप मचाने वाला बहुचर्चित फरीदाबाद मस्जिद तलवार कांड आखिरकार 8 साल बाद अपने अंजाम पर पहुंच गया। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इस मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए भीमसेना प्रमुख नवाब सतपाल तंवर को बड़ी कानूनी राहत प्रदान की है।
चंडीगढ़ स्थित पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में जस्टिस यशवीर सिंह राठौड़ की एकल पीठ ने सुनवाई के बाद सतपाल तंवर के खिलाफ दर्ज एफआईआर को पूरी तरह रद्द (क्वैश) कर दिया। अदालत ने माना कि दोनों पक्षों के बीच शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण और भाईचारे के साथ समझौता हो चुका है, ऐसे में आपराधिक कार्यवाही को आगे बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं रह जाता।
क्या था फरीदाबाद मस्जिद तलवार कांड
यह मामला वर्ष 2018 का है, जब एक प्रेम प्रसंग से जुड़े दलित युवक की हत्या के बाद क्षेत्र में तनाव फैल गया था। इसी दौरान आरोप लगे कि कुछ संगठनों द्वारा माहौल को भड़काया गया।
इसी पृष्ठभूमि में भीमसेना प्रमुख नवाब सतपाल तंवर अपने समर्थकों के साथ फरीदाबाद की 3 नंबर मस्जिद पहुंचे। आरोप था कि वहां तलवारें लहराई गईं और तंवर के काफिले से तलवारों का जखीरा बरामद हुआ।
फरीदाबाद पुलिस ने गुरुग्राम से सतपाल तंवर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। मामले में एक व्यक्ति को हिरासत में लेकर सरकारी गवाह बनाया गया, जो बाद में रहस्यमय तरीके से गायब हो गया और कभी अदालत में पेश नहीं हुआ।
गंभीर धाराओं में दर्ज हुआ था मुकदमा
मस्जिद के मौलवी मरहूम हाजी कमरुद्दीन की शिकायत पर पुलिस ने सतपाल तंवर के खिलाफ आईपीसी की धारा 148, 149, 295ए और 506 सहित गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया था। गिरफ्तारी के बाद जिले में धारा 144 लागू करनी पड़ी और भारी पुलिस व अर्धसैनिक बल तैनात किए गए थे।
लंबी कानूनी लड़ाई और समझौता
यह मामला वर्षों तक हाईकोर्ट में लंबित रहा। इस दौरान मुख्य शिकायतकर्ता हाजी कमरुद्दीन का निधन हो गया। निधन से पूर्व उन्होंने अदालत में बयान देकर सतपाल तंवर के पक्ष में समझौते की बात कही थी। बाद में उनके छह पुत्रों—रहीश अहमद, जरीफ, इमरान, सद्दाम हुसैन, इशुब और इनुस—के साथ पंचायती व कानूनी समझौता हुआ।
हाईकोर्ट के निर्देश पर फरीदाबाद जिला न्यायालय में वारिसों के बयान दर्ज किए गए, जिसकी रिपोर्ट पुलिस ने हाईकोर्ट को सौंपी। राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ डीएजी हरियाणा ने भी समझौते की पुष्टि करते हुए एफआईआर रद्द करने पर सहमति जताई।
हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
सभी तथ्यों और समझौते को देखते हुए जस्टिस यशवीर सिंह राठौड़ ने 8 साल पुराने इस मामले को पूरी तरह समाप्त करने का आदेश दिया। इस फैसले को न्याय, समझौते और सामाजिक सौहार्द की जीत के रूप में देखा जा रहा है।
फैसले के बाद जश्न और आभार
फैसले के बाद भीमसेना कार्यकर्ताओं और समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। विभिन्न राज्यों में मिठाइयां बांटकर जश्न मनाया गया।
सतपाल तंवर ने हाईकोर्ट के न्यायाधीश, अपने अधिवक्ताओं, हरियाणा सरकार के वकीलों, पुलिस प्रशासन, शिकायतकर्ता के परिजनों और अपने समर्थकों का आभार जताते हुए इसे संविधान, सच्चाई और भाईचारे की जीत बताया।
8 वर्षों बाद इस बहुचर्चित मामले का पटाक्षेप हो गया है और भीमसेना प्रमुख नवाब सतपाल तंवर को बड़ी कानूनी राहत मिली है।

