रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

कहते हैं कि मजदूर का पसीना सूखने से पहले उसकी मजदूरी मिल जानी चाहिए, लेकिन यहां मजदूरों को 6 माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद आज तक उनकी मेहनत की कमाई नहीं मिली। मजबूर होकर कर्मचारियों को कंपनी के गेट के बाहर धरना प्रदर्शन करना पड़ा।

झाबुआ जिले के मेघनगर औद्योगिक क्षेत्र में स्थित ओवेस मित्तल मिनरल प्रोसेसिंग लिमिटेड, प्लॉट क्रमांक 57, 58, 58A, केवीएन इंडस्ट्रियल एरिया, मेघनगर द्वारा स्टाफ और मजदूरों की लगभग 6 महीने की मजदूरी का भुगतान नहीं किए जाने की शिकायत जिला मुख्यालय से लेकर राजधानी तक की जा चुकी है, लेकिन आज दिनांक तक कंपनी प्रबंधन द्वारा भुगतान नहीं किया गया।
आर्थिक तंगी से जूझ रहे मजदूरों का सब्र अब टूट चुका है, जिसके चलते उन्होंने कंपनी के गेट के बाहर धरना देकर विरोध प्रदर्शन किया।
पीड़ित महिला स्टाफ ने बताया कि कंपनी के जिम्मेदारों द्वारा बीते 6 महीनों से केवल झूठी तसल्ली दी जा रही है।
पीड़िता परिधि ने बताया कि उनके पिता की तबीयत गंभीर है और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है, लेकिन इलाज के लिए पैसे नहीं हैं। बार-बार वेतन की मांग करने के बावजूद भुगतान नहीं किया जा रहा है।
उमा धाकड़, निवासी ग्राम पंचायत काचलिया, ब्लॉक आलोट, जिला रतलाम ने बताया कि कंपनी द्वारा सैलरी नहीं दिए जाने के कारण पूरा परिवार परेशान है और आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है।
कर्मचारियों ने बताया कि कंपनी प्रबंधन तारीख पर तारीख दे रहा है, लेकिन मेहनताना नहीं दिया जा रहा। ऑनलाइन शिकायत करने के बावजूद वहां भी तारीख आगे बढ़ा दी गई। सहायक श्रम पदाधिकारी झाबुआ को भी शिकायत की गई, जहां बताया गया कि कंपनी प्रबंधन ने 15 जनवरी 2026 तक भुगतान करने का आश्वासन दिया है।
उमा ने बताया कि श्रम अधिकारी ने स्पष्ट रूप से कहा कि इतनी बड़ी राशि दिलाने का अधिकार उनके पास नहीं है और इसके लिए लेबर कोर्ट रतलाम जाना होगा।
मजबूर महिला कर्मचारियों का कहना है कि कंपनी आखिर कब भुगतान करेगी, इसका कोई भरोसा नहीं है। तारीख पर तारीख दी जा रही है, जिससे मजबूर होकर मजदूरों को कंपनी के गेट के बाहर धरना प्रदर्शन करना पड़ रहा है। अब देखना यह है कि कंपनी प्रबंधन मजदूरों को उनका हक देता है या फिर एक और तारीख का झुनझुना थमा देता है।

