प्रेम विवाह के विवाद के बाद पुलिस पर हमला: 28 नामजद, दो गिरफ्तार, गांव में कड़ी सुरक्षा | New India Times

इदरीस मंसूरी, ब्यूरो चीफ, गुना (मप्र), NIT:

प्रेम विवाह को लेकर बढ़े तनाव के बीच चांचौड़ा थाना क्षेत्र के पैंची गांव में पुलिस पर हुए हमले के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। पुलिस टीम पर जानलेवा हमले के मामले में अब तक दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 28 नामजद सहित कई अन्य लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया है। गांव और आसपास के क्षेत्रों में एक सैकड़ा से अधिक पुलिस बल तैनात है और उपद्रवियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।

मंगलवार सुबह कलेक्टर किशोर कन्याल और पुलिस अधीक्षक अंकित सोनी घायल पुलिसकर्मियों से मिलने जिला अस्पताल पहुंचे। अधिकारियों ने उपचार की जानकारी ली और डॉक्टरों को बेहतर इलाज के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि पुलिसकर्मियों की हालत स्थिर है, लेकिन घटना को गंभीर मानते हुए आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

जानकारी के अनुसार, युवक-युवती के प्रेम विवाह के बाद से क्षेत्र में तनाव बना हुआ था। युवती के बालिग होने और अपनी इच्छा से विवाह कर पति के साथ रहने की बात सामने आने के बावजूद परिजन उसे जबरन साथ ले जाना चाहते थे। इसी आक्रोश में सोमवार को पैंची गांव के पास नेशनल हाईवे-46 की सर्विस रोड पर भीड़ ने चक्का जाम करने की कोशिश की।

स्थिति का जायजा लेने पहुंचे दो आरक्षकों को भीड़ ने घेरकर मारपीट की और बंधक बना लिया। बाद में जब फोर्स पहुंचा तो भीड़ ने लाठी-डंडों, फर्सी और पत्थरों से हमला कर दिया। इस घटना में एक एएसआई और एक प्रधान आरक्षक सहित चार पुलिसकर्मी घायल हुए और एक सरकारी वाहन को नुकसान पहुंचा।

घटना के बाद पुलिस ने रातभर सघन तलाशी अभियान चलाया। फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर 28 नामजद आरोपियों की पहचान की गई और भारतीय न्याय संहिता 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिनमें बलवा, शासकीय कार्य में बाधा और जानलेवा हमले जैसी गंभीर धाराएं शामिल हैं।

एसपी अंकित सोनी ने बताया कि क्षेत्र में शांति है और पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है। दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है तथा बाकी की जल्द गिरफ्तारी होगी।

उन्होंने अपील की कि ऐसी परिस्थितियों में कानून को हाथ में लेने के बजाय परिवार और समाज को बातचीत से समाधान निकालना चाहिए, क्योंकि बालिग बच्चे कानूनन अपना निर्णय स्वयं ले सकते हैं।

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