ज़फ़र खान, अकोट/अंकोल (महाराष्ट्र), NIT:
रेलवे में नौकरी दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी करने वाले दो मुख्य आरोपियों — अरुण राठौड़ और विलास जाधव — को अकोट सत्र न्यायालय से बड़ा झटका लगा है। माननीय अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश बी.एम. पाटिल ने दोनों आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
आरोपियों — अरुण हरीशचंद्र राठौड़ (उम्र 44, निवासी सारकीन्ही, अकोला) और विलास गोवर्धन जाधव (निवासी अमरावती) — पर अकोट और तेलहारा तालुका के कई शिक्षित बेरोजगार युवाओं से भारतीय रेलवे में वाणिज्यिक लिपिक पद पर नौकरी दिलाने का वादा करके कुल 6 लाख 15 हजार रुपये ठगने का आरोप है। यह मामला अकोट शहर पुलिस स्टेशन में अपराध क्र. 58/2024 के तहत भारतीय दंड संहिता की धाराओं 420, 465, 468 और 471 में दर्ज है।
सरकारी वकील अजित देशमुख ने अदालत में जमानत याचिका का कड़ा विरोध करते हुए बताया कि आरोपी 08.02.2024 से फरार हैं और मामला अत्यंत गंभीर है। उन्होंने तर्क दिया कि ठगी के इस रैकेट का खुलासा करने के लिए आरोपियों की पुलिस हिरासत आवश्यक है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इसमें और कौन-कौन शामिल हैं तथा कितने अन्य बेरोजगार युवाओं को ठगा गया है।
फरियादी रूपाली गवळी के अनुसार, आरोपियों ने रेलवे में नौकरी का झांसा देकर पैसे लिए, मेडिकल के फर्जी पत्र भेजे और कल्याण स्थित सरकारी रेलवे अस्पताल तक ले गए। बाद में डाक से फर्जी नियुक्ति पत्र भेजे गए, जिसके बाद पीड़ितों को मुंबई पहुंचकर ठगी का पता चला।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, न्यायालय ने माना कि ठगी के बड़े रैकेट का पर्दाफाश करने के लिए पुलिस हिरासत आवश्यक है। इसलिए अदालत ने आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका नामंजूर कर दी। अब अकोट शहर पुलिस (थानेदार अमोल माळवे और पीएसआई वैभव तायडे) इन फरार आरोपियों की गिरफ्तारी कब करती है, इस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।

