मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, मुंबई (महाराष्ट्र), NIT:
महाराष्ट्र में लंबे अरसे बाद नगर निकाय चुनाव की गतिविधियाँ तेज़ हो गई हैं। विशेष रूप से मुंबई का राजनीतिक माहौल काफ़ी जटिल दिखाई दे रहा है। सभी राजनीतिक दलों के साथ-साथ ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के शीर्ष नेतृत्व के चुनावी मैदान में उतरने के बाद राजनीतिक हालात में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। इन परिस्थितियों को देखते हुए न्यू फ्यूचर फाउंडेशन, मुंबई के अध्यक्ष हाजी शकील अहमद अंसारी ने एक बयान जारी किया है।
उन्होंने कहा कि सात वर्षों बाद नगर निगम का चुनाव होने जा रहा है। इस दौरान सभी नगर निगमों में कमिश्नर राज लागू रहा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब जनवरी में चुनाव होना तय हो गया है। देश की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए जनता को उम्मीद थी कि सभी धर्मनिरपेक्ष पार्टियाँ एकजुट होकर सांप्रदायिक शक्तियों का मुकाबला करेंगी, लेकिन अफसोस कि ऐसा नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि धर्मनिरपेक्ष पार्टियाँ बिखरी हुई नज़र आ रही हैं, जिसके कारण उनके आपसी मतभेदों से सांप्रदायिक ताकतों के जीतने की संभावनाएँ बढ़ गई हैं। कुछ वार्डों में पुराने कार्यकर्ताओं को नज़रअंदाज़ कर नए चेहरों को टिकट देने से असंतोष पैदा हुआ है। इसी वजह से कई स्थानीय नेता विरोधी दलों से टिकट लेकर अपनी ही पार्टी के खिलाफ खड़े हो गए हैं।
हाजी शकील अहमद का कहना है कि सियासी वफ़ादारियाँ बदलने वालों को दंडित करना आवश्यक है, ताकि उम्मीदवार और पार्टी—दोनों को सबक मिले। उन्होंने अपील की कि हर वार्ड में जागरूक नागरिक मिलकर विचार-विमर्श करें और परामर्श के बाद ऐसे उम्मीदवार को वोट दें, जो धर्मनिरपेक्ष सोच रखता हो, ताकि अधिक से अधिक सेक्युलर प्रतिनिधि नगर निगम में पहुँच सकें।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो आने वाले पाँच वर्षों तक जनता के पास पछतावे के अलावा कुछ नहीं बचेगा।

