समय पर सर्जरी से बची बच्चेदानी, महिला में फिर जगी मातृत्व की उम्मीद | New India Times

मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

38 वर्षीय एक महिला पेट में लगभग 3 किलो की गांठ के उपचार हेतु ऑल इज़ वेल हॉस्पिटल पहुँची। काउंसिलिंग के दौरान पता चला कि करीब तीन माह पहले यह गांठ केवल 4 सेंटीमीटर (संतरे के आकार) की थी, जो कम समय में असामान्य रूप से बढ़ गई। इसके कारण मरीज को पेट फूलना, तेज दर्द, लगातार कब्ज़ और आंतों में भोजन का मार्ग अवरुद्ध होने जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था।

परिवार की सबसे बड़ी चिंता बच्चेदानी को सुरक्षित रखना था, क्योंकि मरीज के मन में अब भी माँ बनने की उम्मीद थी। हॉस्पिटल के चिकित्सकों ने आश्वस्त किया कि इस आयु में बच्चेदानी निकालना आवश्यक नहीं है और केवल गांठ को सुरक्षित रूप से हटाकर बच्चेदानी को संरक्षित किया जा सकता है।

डॉ. किमाया साळी और डॉ. मोनिश गुप्ता (प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ), डॉ. हितेषी बैस तथा डॉ. अमृता टाटू (एनेस्थेटिस्ट) की विशेषज्ञ टीम ने अत्यंत सावधानी और दक्षता के साथ 3 किलो की गांठ सफलतापूर्वक निकालते हुए बच्चेदानी को सुरक्षित रखा। सर्जरी के बाद मरीज पूरी तरह स्वस्थ है, दर्द से मुक्त है और सामान्य जीवन जी रही है।

आज मरीज के चेहरे पर संतोष और परिवार की आँखों में राहत है, क्योंकि उसकी माँ बनने की उम्मीद अब भी कायम है। यह उपचार केवल बीमारी का नहीं, बल्कि उम्मीद और विश्वास का उपचार है। इसी भरोसे को कायम रखा है मध्य भारत के प्रमुख मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल — ऑल इज़ वेल, बुरहानपुर ने, जो शहरवासियों को स्वास्थ्य के प्रति लगातार जागरूक कर रहा है।

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