त्रिवेंद्र जाट, देवरी/सागर (मप्र), NIT:

मध्य प्रदेश की भाजपा मोहन यादव सरकार में एक ताजा मामला सामने आया है, जहां सागर जिले की देवरी विधानसभा अंतर्गत सहजपुर सेक्टर के ग्राम मेहंदा में आंगनवाड़ी सहायिका नियुक्ति को लेकर एक दलित महिला को पात्र होने के बावजूद करीब चार माह से नियुक्ति पत्र नहीं दिया गया है।

ग्राम मेहंदा में आंगनवाड़ी सहायिका पद के लिए कुल छह महिलाओं ने आवेदन किया था, जिनमें दलित वर्ग की महिला संध्या मेहरा को सबसे अधिक अंक प्राप्त हुए थे।
नियमानुसार महिला एवं बाल विकास विभाग, केसली द्वारा उन्हें नियुक्ति पत्र जारी किया जाना था, लेकिन विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों की कथित मिलीभगत के चलते अब तक नियुक्ति पत्र नहीं दिया गया।
पीड़ित महिला का आरोप है कि महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी केसली द्वारा लगातार बहाने बनाए जा रहे हैं और पिछले चार महीनों से उन्हें कार्यालय के चक्कर कटवाए जा रहे हैं। कभी जिला स्तर पर जांच का हवाला दिया जाता है तो कभी अन्य आपत्तियों की बात कही जाती है।
परेशान होकर संध्या मेहरा ने देवरी विधायक ब्रजबिहारी बिहारी पटेरिया के कार्यालय में लिखित आवेदन दिया, जहां से मामले की जांच कर नियुक्ति देने के निर्देश केसली एसडीएम को दिए गए। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
इसके बाद पीड़िता ने सागर कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ एवं केसली एसडीएम को भी लिखित शिकायत दी, लेकिन करीब चार माह बीत जाने के बाद भी नियुक्ति पत्र नहीं मिल सका है। पीड़ित महिला दर-दर भटकने को मजबूर है और उसे न्याय दिलाने वाला कोई जनप्रतिनिधि या अधिकारी नजर नहीं आ रहा।
पीड़ित महिला के पति नीरज मेहरा का आरोप है कि परियोजना अधिकारी जानबूझकर नियुक्ति पत्र में देरी कर रही हैं और किसी कम अंक प्राप्त महिला को गलत तरीके से नियुक्ति देने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि अब उन्हें देवरी विधायक और सागर कलेक्टर से ही न्याय की उम्मीद है।
अधिकारियों का पक्ष
भरत सिंह ठाकुर, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग, सागर:
“इनकी नियुक्ति पर आपत्ति दर्ज है। बीपीएल सूची से नाम कटने को लेकर जांच चल रही है। अपील प्रस्तुत की जाए, उसके बाद कार्रवाई की जाएगी।”
ममता खटीक, परियोजना अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग, केसली:
“ग्राम मेहंदा की सहायिका नियुक्ति को लेकर जिला स्तर पर जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही नियुक्ति पत्र दिया जा सकेगा।”
पीड़िता का बयान
संध्या मेहरा, पीड़ित महिला (ग्राम मेहंदा):
“मेरे सबसे ज्यादा अंक होने के बावजूद मुझे चार महीने से नियुक्ति पत्र नहीं दिया जा रहा है। विधायक, कलेक्टर, सीईओ और एसडीएम तक शिकायत कर चुकी हूं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।”
